कुंदन कुमार, पटना। राजनीति में फरक्का जल संधि को लेकर पारा चढ़ गया है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और पूर्व की सरकारों पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि इस संधि के कारण पिछले तीन दशकों से बिहार लगातार उपेक्षा और नुकसान का शिकार हो रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​फरक्का बैराज और बिहार का जल संकट

​पश्चिम बंगाल में स्थित फरक्का बैराज के निर्माण के कारण गंगा नदी में भारी मात्रा में गाद (सिल्ट) जमा हो रही है, जिससे नदी का तल लगातार उथला होता जा रहा है। नदी की जलधारण क्षमता कम होने का सीधा असर बिहार के पर्यावरण और भूगोल पर पड़ रहा है। राज्य के 12 गंगा-तटीय जिलों में इसका सबसे बुरा प्रभाव देखने को मिल रहा है, जहां एक ओर लोगों को भीषण बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है, तो वहीं दूसरी ओर कई इलाके सूखे की चपेट में आ जाते हैं। बढ़ती आबादी के दौर में पानी की मांग तो तेजी से बढ़ी है, लेकिन इस संधि की वजह से बिहार को उसके हिस्से का वाजिब पानी नहीं मिल पा रहा है।

​राजनीतिक स्वार्थ और तत्कालीन नेतृत्व की विफलता

​जदयू प्रवक्ता चंदन कुमार सिंह ने 1996 की इस संधि के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि राजनीतिक स्वार्थ के चलते उस समय बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी गई। वर्ष 1996 में जब यह संधि हुई, तब लालू प्रसाद यादव न सिर्फ बिहार के मुख्यमंत्री थे, बल्कि केंद्र की संयुक्त मोर्चे की सरकार में भी वे बेहद प्रभावशाली स्थिति में थे। तत्कालीन विदेश मंत्री आई.के. गुजराल के साथ उनके अच्छे संबंधों के बावजूद उन्होंने इस समझौते का विरोध नहीं किया, जबकि वे चाहते तो इस संधि को रुकवा सकते थे।

​ नीतीश कुमार और संजय झा का कड़ा रुख

​इसके विपरीत, नीतीश कुमार ने हमेशा फरक्का जल संधि और इसके दुष्प्रभावों के खिलाफ मुखर होकर विरोध दर्ज कराया है। नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर गंगा में जमा हो रही गाद की समस्या और फरक्का बैराज से राज्य को हो रहे नुकसान के पुख्ता तथ्यों से अवगत कराया था, साथ ही इसके स्थायी समाधान की मांग की थी। इसके अलावा, पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में इस मुद्दे को आक्रामकता के साथ उठाया और इस संधि के नवीनीकरण का पुरजोर विरोध किया है। संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा वर्तमान में प्रभावित 12 जिलों का दौरा कर जनता को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने में जुटे हैं।

​भविष्य का गंभीर खतरा और चेतावनी

​यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बिहार को आने वाले दिनों में विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। भू-जलस्तर में लगातार आ रही गिरावट के कारण राज्य के कई हिस्सों में पेयजल का भारी संकट खड़ा हो सकता है। इसके साथ ही कृषि के लिए सिंचाई जल की कमी और उद्योगों को सुचारू रूप से पानी न मिलने जैसी गंभीर समस्याएं भी विकराल रूप ले सकती हैं। जदयू ने साफ कर दिया है कि बिहार के अधिकारों और हितों से अब कोई समझौता नहीं किया जाएगा।