पटना। शहर स्थित संजय गांधी जैविक उद्यान (चिड़ियाघर) आने वाले पर्यटकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। करीब 14 साल के लंबे इंतजार के बाद विजिटर्स एक बार फिर आधुनिक टॉय ट्रेन का लुत्फ उठा सकेंगे। चिड़ियाघर प्रशासन और रेलवे के संयुक्त प्रयास से इस ऐतिहासिक धरोहर को पुनर्जीवित किया जा रहा है। रेलवे ने नई इलेक्ट्रिक ट्रेन और अत्याधुनिक बोगियों की खरीद का टेंडर फाइनल कर दिया है। इस पूरी परियोजना पर लगभग 15 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जिसके तहत मार्च 2027 तक टॉय ट्रेन के फिर से पटरी पर उतरने की उम्मीद है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा नया ट्रैक और स्टेशन
पुरानी और जर्जर हो चुकी पटरियों तथा स्लीपरों को हटाने का काम तेजी से चल रहा है। पर्यटकों को शेर, बाघ, भालू और जिराफ जैसे वन्यजीवों का दीदार आसानी से कराने के लिए करीब 3.7 किलोमीटर लंबा नया ट्रैक तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा मार्ग में कुल तीन नए स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा। हर स्टेशन पर दो आधुनिक प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे, जिन पर यात्रियों की सुविधा के लिए अत्याधुनिक शेड लगाए जाएंगे। इससे पहले लगभग 4 किलोमीटर के दायरे में पुरानी पटरी बिछी हुई थी, जिसे पूरी तरह अपग्रेड किया जा रहा है।
प्रदूषण मुक्त सफर और किफायती किराया
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस बार डीजल इंजन के स्थान पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक इंजन का उपयोग किया जाएगा, जिससे यह सफर पूरी तरह प्रदूषण मुक्त होगा। इस नई टॉय ट्रेन की यात्री क्षमता एक बार में 80 पर्यटकों की होगी। इसके लिए यात्रियों को 50 से 100 रुपए के बीच प्रति व्यक्ति टिकट शुल्क देना होगा। किफायती दर और प्रदूषण मुक्त होने के कारण यह बच्चों और बड़ों दोनों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बनेगी।
टॉय ट्रेन का इतिहास और चिड़ियाघर का आकर्षण
पटना चिड़ियाघर में टॉय ट्रेन के परिचालन की शुरुआत पहली बार साल 1977 में हुई थी। इसके बाद इस धरोहर को संवारने के लिए साल 2004 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के सहयोग से रेल मंत्रालय ने एक नया स्टीम इंजन वाली शिशु ट्रेन उपहार में दी थी। हालांकि, समय के साथ पटरियों के रखरखाव में कमी, स्लीपरों के टूटने और ढांचे के जर्जर होने के कारण यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई थी, जिसके चलते 2013 में इसका परिचालन पूरी तरह बंद करना पड़ा था।
दूसरी ओर, पटना चिड़ियाघर अपनी खूबसूरती और वन्यजीवों की विविधता के लिए देश भर में प्रसिद्ध है। यहां हर साल 25 लाख से अधिक पर्यटक भ्रमण के लिए पहुंचते हैं। यहां बाघ, शेर, भालू, जिराफ सहित 1100 से अधिक प्रजातियों के वन्यजीव और पक्षी मौजूद हैं। पर्यटकों के मनोरंजन और जानकारी के लिए वन्यजीवों पर आधारित फिल्में दिखाने वाला थिएटर हर दिन संचालित होता है, और टिकट के लिए काउंटर के पास आधुनिक कियोस्क मशीनें भी लगाई गई हैं जहां लोग खुद से आसानी से टिकट बुक कर सकते हैं।



