मुजफ्फरपुर। एक स्कूल के प्रभारी हेडमास्टर द्वारा अपने कार्यालय और कुर्सी का गंगाजल से ‘शुद्धीकरण’ करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस गंभीर अनुशासनहीनता और अंधविश्वास फैलाने वाले कृत्य पर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी हेडमास्टर को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही, उनका वेतन भी रोक दिया गया है और मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
​यह पूरी घटना 4 सितंबर की बताई जा रही है। वीडियो क्लिप जब शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंची, तो प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। इसके तुरंत बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कुमार अरविंद सिन्हा ने मामले का संज्ञान लेते हुए प्रभारी हेडमास्टर से स्पष्टीकरण मांगा था। शुरुआती जांच में इस कृत्य को सरकारी सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन और ड्यूटी के दौरान अनुशासनहीनता माना गया।

​क्या है पूरा मामला और क्यों उठा विवाद?

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरपुर के मुरौल प्रखंड अंतर्गत शिवनंदन उच्च माध्यमिक विद्यालय में ज्ञान प्रकाश को प्रभारी हेडमास्टर का पद सौंपा गया था। उनसे ठीक पहले इस पद पर सुशील कुमार चौधरी कार्यरत थे, जो सहनी जाति से ताल्लुक रखते थे और समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर के निवासी थे। वहीं, वर्तमान प्रभारी हेडमास्टर ज्ञान प्रकाश भूमिहार जाति से हैं।
​सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में ज्ञान प्रकाश अपने कार्यालय के कक्ष में मंत्रोच्चार के साथ गंगाजल का छिड़काव करते और अपनी कुर्सी का ‘शुद्धीकरण’ करते हुए साफ नजर आ रहे हैं। शिक्षा विभाग का स्पष्ट मानना है कि इस तरह की गतिविधियां सरकारी विद्यालयों के शैक्षणिक माहौल को दूषित करती हैं तथा समाज में गलत संदेश और अंधविश्वास को बढ़ावा देती हैं। एक सरकारी शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारी से यह उम्मीद की जाती है कि वह विद्यालय परिसर में वैज्ञानिक सोच, निष्पक्षता और आपसी सद्भाव को कायम रखेगा।

​हेडमास्टर की सफाई और बचाव पक्ष

​कार्यालय और कुर्सी के शुद्धिकरण को लेकर जब विवाद बढ़ा और प्रशासनिक कार्रवाई की गाज गिरी, तो प्रभारी हेडमास्टर ज्ञान प्रकाश ने अपनी सफाई में एक अलग ही कहानी बयां की। उनका कहना है कि वे विद्यालय के कार्यालय से लेकर कक्षाओं तक में प्रतिदिन नियमित रूप से पूजा-पाठ करते हैं तथा ज्ञान की देवी मां शारदे को नमन करने के बाद ही अपनी दिनचर्या शुरू करते हैं।
​ज्ञान प्रकाश ने अपनी सफाई में यह भी तर्क दिया कि वे पहले भी ऐसा ही करते आए हैं जब सुशील चौधरी विद्यालय में पदस्थ थे। उन्हें 2 सितंबर को प्रभारी प्राचार्य का प्रभार मिला था और उसी दौरान सामान्य पूजा-पाठ के क्रम में गंगाजल का छिड़काव किया गया था। उन्होंने दावा किया कि उस वक्त कुछ शिक्षकों ने आपसी हंसी-मजाक में ‘सर शुद्ध कर लीजिए’ जैसी बातें कही थीं, और उसी दौरान के वीडियो को किसी ने सोची-समझी साजिश के तहत सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। उनका यह भी कहना था कि उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं थी, क्योंकि सभी शिक्षक समान होते हैं और शिक्षा के क्षेत्र में जाति, धर्म या मजहब का कोई स्थान नहीं होता।

​शिक्षा विभाग का कड़ा संदेश

​जिला शिक्षा पदाधिकारी ने अपने निलंबन आदेश में दो टूक शब्दों में कहा है कि हेडमास्टर का यह कृत्य सरासर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। शिक्षा विभाग ने इस कार्रवाई के जरिए यह कड़ा संदेश देने का प्रयास किया है कि सरकारी विद्यालयों में अनुशासन के दायरे से बाहर जाकर किसी भी प्रकार के भेदभावपूर्ण या अंधविश्वासी कृत्यों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद आगे की कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।