मुकेश मेहता, बुधनी। महाकाल लोक की तर्ज पर सलकनपुर में करीब 97 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किए जा रहे देवी लोक की पहली ही बारिश में गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। 64 योगिनी मंदिर के पिलरों से पानी रिसने, मणिदीप क्षेत्र में जलभराव और लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए अधिकांश पौधों के सूखने से निर्माण एजेंसियां कठघरे में हैं।

सलकनपुर देवी धाम में लगभग 90.35 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे सिविल निर्माण में पहली ही बारिश के दौरान कई स्थानों पर पानी रिसता दिखाई दिया। 64 योगिनी मंदिर के पिलरों के किनारों से पानी टपकने की तस्वीरें सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

परिसर को हरा-भरा बनाने के लिए 444 पौधे ट्री-गार्ड सहित लगाए गए थे। जानकारी के अनुसार प्रति पौधा करीब 1800 रुपये खर्च किए गए, लेकिन उचित देखरेख के अभाव में लगभग 80 प्रतिशत पौधे सूख चुके हैं। इससे पौधरोपण और रखरखाव की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

वहीं मणिदीप क्षेत्र में बिछाए गए बंसी पहाड़पुर पत्थरों पर पहली ही बारिश में पानी भर गया। इससे श्रद्धालुओं के फिसलने और हादसे की आशंका बढ़ गई है। परिसर में कई कार्य अब भी अधूरे नजर आ रहे हैं, जिससे जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

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