कुंदन कुमार/ पटना। बिहार की राजनीति में सरकारी बंगले को लेकर घमासान तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी ने अपना 20 साल पुराना सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड खाली करने से साफ इनकार कर दिया है। भवन निर्माण विभाग द्वारा तीसरी बार नोटिस भेजे जाने के बाद राबड़ी देवी ने तल्ख तेवर अपनाते हुए कहा है कि वे किसी भी कीमत पर यह बंगला खाली नहीं करेंगी।

​विभाग का आदेश और नया आवंटन

​भवन निर्माण विभाग ने हाल ही में जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि 10 सर्कुलर रोड वाला आवास अब डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित कर दिया गया है। विभाग के अनुसार, राबड़ी देवी को पहले ही 39 हार्डिंग रोड स्थित आवास आवंटित किया जा चुका है जो विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के लिए निर्धारित है। विभाग का कहना है कि 25 नवंबर 2025 के आदेश के बावजूद पूर्व सीएम ने अब तक पुराने आवास का कब्जा नहीं छोड़ा है।

​राबड़ी देवी का दो-टूक जवाब

​दिल्ली से पटना लौटने के तुरंत बाद राबड़ी देवी ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए चुनौती दी कि यदि सरकार को बंगला खाली करवाना है तो वे सीधे फोर्स (पुलिस बल) भेजकर इसे खाली करवा लें। राबड़ी देवी का रुख स्पष्ट है कि वे इस आवास से हटने को तैयार नहीं हैं।

​लालू परिवार का भावनात्मक जुड़ाव

​लालू प्रसाद यादव का परिवार साल 2005 से ही 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में रह रहा है। यह आवास न केवल उनके निवास के रूप में, बल्कि राजद की गतिविधियों के मुख्य केंद्र के रूप में भी जाना जाता रहा है।
​इस मुद्दे पर लालू परिवार एकजुट नजर आ रहा है। पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा छोटे भाई ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और बड़े भाई के बंगले को खाली करने का आदेश दे दिया। 28 साल से जिस आवास के साथ बिहार और राजद कार्यकर्ताओं का भावुक रिश्ता था, उसे एक नोटिस में खत्म कर दिया गया। इसके साथ ही नीतीश जी और लालू जी के बीच के नैतिक रिश्तों का भी अंत हो गया है।

​क्या खाली हो रहा है बंगला?

​हालांकि राबड़ी देवी ने सार्वजनिक रूप से इनकार किया है लेकिन अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि बंगला खाली करने की प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है। कहा जा रहा है कि घर का सामान धीरे-धीरे महुआ बाग और आर्य समाज रोड स्थित अन्य ठिकानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार वास्तव में बल प्रयोग करेगी या यह विवाद आगे और गहराएगा।