प्रयागराज. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मनुस्मृति को लेकर दिए गए हालिया बयान पर प्रयागराज के साधु-संतों ने कड़ी आपत्ति जताई है. संतों का कहना है कि किसी भी धार्मिक या प्राचीन ग्रंथ को राजनीतिक बयानों के आधार पर नहीं समझना चाहिए. युवा पीढ़ी को इसके मूल संदर्भ और अर्थ की जानकारी दी जानी चाहिए.

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दरअसल, पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महिलाओं की स्थिति को लेकर मनुस्मृति का जिक्र किया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि महिलाओं को दबाने की सोच मनुस्मृति से आई है. राहुल के इस बयान के बाद प्रयागराज के संतों ने आपत्ति जताते हुए ग्रंथ की समग्र व्याख्या करने की जरूरत बताई है.

मनुस्मृति को विवाद का विषय बनाने पर आपत्ति

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मां मनसा देवी मंदिर के प्रमुख महंत रवींद्र पुरी ने राहुल गांधी के बयान को आपत्तिजनक बताया. उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए मनुस्मृति को विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है. महंत रवींद्र पुरी के मुताबिक, लोगों को मनुस्मृति के बारे में सही जानकारी देने की जरूरत है. उन्होंने कथावाचकों से भी अपील की कि वे अपनी कथाओं और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं को इस ग्रंथ के संदर्भ और अर्थ की जानकारी दें.

संत बोले- धार्मिक ग्रंथों को चुनिंदा तरीके से न देखें

अमेठी के टिकरमाफी आश्रम और झूंसी के संत हरि चैतन्य ब्रह्मचारी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को भारत की परंपराओं और धार्मिक ग्रंथों से सही स्रोतों के जरिए जोड़ने की जरूरत है. संत ने कहा कि नेताओं को नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. धार्मिक ग्रंथों की चुनिंदा बातों को उद्धृत करके उनकी पूरी विचारधारा पर निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए.

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

राहुल गांधी ने पुणे के कार्यक्रम में महिलाओं की स्थिति पर चर्चा करते हुए मनुस्मृति का उल्लेख किया था. उन्होंने कहा था कि महिलाओं को केवल बेटी, पत्नी या मां के रूप में सीमित नहीं किया जा सकता. इसी दौरान उन्होंने मनुस्मृति में महिलाओं को लेकर लिखी गई बातों की आलोचना की थी. राहुल के बयान के बाद अब प्रयागराज के साधु-संतों ने इस मुद्दे को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने की बात कही है. संतों का कहना है कि मनुस्मृति जैसे प्राचीन ग्रंथों को समझने के लिए उनके ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.

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फिलहाल, राहुल गांधी के बयान को लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस जारी है. संतों की आपत्ति के बाद यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है.