जयपुर। राजस्थान के सभी सरकारी सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों में जल्द ही राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र स्थापित किए जाएंगे। राज्यपाल के निर्देश पर राज्यपाल सचिवालय ने प्रदेश के 11 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों (वीसी) को पत्र भेजकर तत्काल केंद्र स्थापित करने और इसकी अनुपालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। यह रिपोर्ट राज्यपाल को प्रस्तुत की जाएगी।
राज्यपाल के सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि राजस्थानी भाषा प्रदेश के बड़े भू-भाग में बोली जाने वाली प्रमुख भाषा है और यह राजस्थान की समृद्ध संस्कृति एवं विरासत का प्रतिनिधित्व करती है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रमुख विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र स्थापित किए जाना आवश्यक है।
पत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें मातृभाषा में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इसी नीति के अनुरूप विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा के अध्ययन और शोध को बढ़ावा देने के लिए यह पहल की जा रही है।
इन 11 विश्वविद्यालयों को लोकभवन ने भेजा लेटर
- राजस्थान विश्वविद्यालय – जयपुर
- जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय – जोधपुर
- मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय – उदयपुर
- महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय – अजमेर
- कोटा विश्वविद्यालय – कोटा
- महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय – बीकानेर
- वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय – कोटा
- गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय – बांसवाड़ा
- पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय – सीकर
- महाराजा सूरजमल ब्रज विश्वविद्यालय – भरतपुर
- राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय – अलवर
गौरतलब है कि हाल ही में राज्यपाल ने प्रदेश के सरकारी सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों में ‘शास्त्रीय मराठी भाषा अध्ययन केंद्र’ खोलने का निर्णय लिया था। इस फैसले के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और भाषा प्रेमियों ने राजस्थानी भाषा को समान महत्व देने की मांग उठाई थी। सोशल मीडिया पर भी राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र स्थापित करने की मांग तेज हो गई थी।
अब राज्यपाल के इस नए आदेश के बाद प्रदेश के विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा के अध्ययन, शोध और संरक्षण को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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