Rajasthan News: राजस्थान विधानसभा में प्रक्रिया नियमों की व्याख्या को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा सचिवालय की ओर से 7 और 9 जनवरी को जारी बुलेटिन पर आपत्ति जताते हुए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को पत्र लिखा है। जूली का कहना है कि इन बुलेटिनों के जरिए विधायकों के सवाल पूछने के अधिकार सीमित किए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।

पुराने मामलों पर सवाल पूछने से नहीं रोका जा सकता
जूली ने पत्र में कहा कि यदि किसी विषय पर सरकार ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है, तो उसे केवल पांच साल पुराना बताकर सवाल पूछने से रोका नहीं जा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि योजनाओं, नियमों और विभागीय जानकारियों का बड़ा हिस्सा पहले से ऑनलाइन उपलब्ध है, इसके बावजूद जानकारी मांगने पर रोक लगाना अनुचित है।
जिला और प्रदेश स्तर के सवालों पर आपत्ति
बुलेटिन के उस बिंदु पर भी जूली ने सवाल उठाए हैं, जिसमें सदस्यों से यथासंभव केवल किसी विशेष क्षेत्र या तहसील तक सीमित जानकारी मांगने को कहा गया है। उनका कहना है कि विधायक केवल अपने क्षेत्र का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का प्रतिनिधि होता है और उसे राज्य के किसी भी जिले, तहसील या गांव से जुड़े प्रश्न पूछने का अधिकार है।
नेता प्रतिपक्ष ने जनवरी 2025 में जारी पुराने बुलेटिन का उल्लेख करते हुए कहा कि नियम 37(2) के तहत प्रश्नों की ग्राह्यता के लिए तय 25 शर्तों में ऐसी किसी पाबंदी का उल्लेख नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि यह रोक किस नियम के आधार पर लगाई जा रही है।
शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर भी चिंता
जूली ने शून्यकाल पर्ची, स्थगन प्रस्ताव और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि कोई सदस्य तात्कालिक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाता है और संबंधित मंत्री जवाब नहीं देता, तो सदन में उस मुद्दे को उठाने का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर भी सदस्य को स्पष्टीकरण मांगने का पूरा अधिकार होना चाहिए।
विवाद पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि बुलेटिन में कुछ भी नया नहीं है। ऐसे सर्कुलर पहले भी जारी होते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संसद और अन्य विधानसभाओं में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाती है और पहले बंद की गई पर्ची व्यवस्था को मौजूदा कार्यकाल में ही दोबारा शुरू किया गया है।
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