Rajasthan News: जिले में दिव्यांग पेंशन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है. प्रशासनिक जांच में मनोहरथाना और अकलेरा ब्लॉकों में 11,975 लोगों ने खुद को कागजों में दिव्यांग दिखाकर हर महीने 1250 रुपये की पेंशन ले रहे थे. कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने इन सभी की पेंशन रोकने और पूरी राशि की वसूली के आदेश जारी कर दिए हैं.

कैसे हुआ खुलासा
जिला प्रशासन ने सरकार के निर्देश पर दोनों ब्लॉकों में 18,192 पेंशनधारियों का भौतिक सत्यापन कराया. जांच में पाया गया कि इनमें से बड़ी संख्या में लोग दिव्यांग थे ही नहीं. रिपोर्ट 2 नवंबर को सामने आई, जिसके बाद कार्रवाई शुरू हुई.
हर महीने डेढ़ करोड़ की निकासी
अपात्र 11,975 लोगों को 1250 रुपये प्रति महीने मिल रहे थे. इस हिसाब से हर महीने करीब 1 करोड़ 49 लाख रुपये की फर्जी पेंशन निकल रही थी. साल भर में यह रकम लगभग 18 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है.
फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाला गिरोह सक्रिय
जांच में एक साइबर गिरोह का भी खुलासा हुआ, जो ई-मित्र केंद्रों के माध्यम से फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बना रहा था. गिरोह के पास CMHO का फर्जी वीडियो-आईडी भी था, जिसके जरिए वे खुद ही सत्यापन कर पेंशन शुरू कर देते थे. रूपाहेड़ा, बिशनखेड़ा और जमुनिया के तीन ई-मित्र केंद्र इस काम में शामिल पाए गए. इन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है.
अब होगी पाई-पाई की वसूली
कलेक्टर ने आदेश दिया है कि सत्यापन की तिथि से लेकर पेंशन बंद होने तक जितनी राशि उठाई गई है, वह पूरी वापस ली जाएगी. जिले के अन्य ब्लॉकों में भी अब पेंशनधारियों का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है.
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