Rajasthan News: राजस्थान में भजनलाल सरकार को आए सवा दो साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन प्रदेश की राजनीति में अपॉइंटमेंट लेटर का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दीपावली गई और अब होली भी बिना किसी सियासी तोहफे के गुजर गई। आलम यह है कि राजस्थान के कई रसूखदार बोर्ड और आयोग आज भी बिना अध्यक्ष के चल रहे हैं, जिससे न केवल प्रशासनिक काम ठप हैं, बल्कि कार्यकर्ताओं का सब्र भी अब जवाब देने लगा है।

चुनाव का डर या गुटबाजी का खतरा?
आखिर ये देरी क्यों हो रही है? सूत्रों की मानें तो इसकी सबसे बड़ी वजह निकाय और पंचायत चुनाव की अनिश्चितता है। सत्ता और संगठन दोनों ही इस समय कोई भी सियासी रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं। अगर अभी नियुक्तियां की गईं, तो टिकट से वंचित और मंत्रिमंडल में जगह न पाने वाले दिग्गजों के बीच गुटबाजी खुलकर सामने आ सकती है।सरकार फिलहाल वेट एंड वॉच की नीति पर काम कर रही है ताकि चुनावी तस्वीर साफ होने के बाद ही रेवड़ियां बांटी जाएं।
इन आयोगों को है मुखिया का इंतजार
- प्रमुख आयोग: महिला आयोग, बाल आयोग, OBC आयोग और अल्पसंख्यक आयोग।
- बोर्ड और परिषद: वक्फ बोर्ड, राज्य खेल परिषद, खादी बोर्ड और आवासन मंडल।
- विकास बोर्ड: डांग विकास बोर्ड, मगरा विकास बोर्ड और राजस्थान राज्य बीज निगम।
विपक्ष हमलावर
इस सुस्ती को लेकर कांग्रेस ने सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। कांग्रेस नेता रफीक खान का आरोप है कि सरकार के पास कोई स्पष्ट नीति नहीं है, जिससे आम जनता के काम प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का कहना है कि यह कोई विवाद नहीं बल्कि एक तय प्रक्रिया है। मुख्यमंत्री और संगठन के बीच लंबी चर्चा के बाद ही नाम फाइनल होंगे, जिसमें समय लगना स्वाभाविक है।
जानें किसे मिलेगी जगह?
सूत्रों के अनुसार, इन नियुक्तियों का इस्तेमाल उन नेताओं को एडजस्ट करने के लिए किया जाएगा जो विधानसभा या लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। इनके अलावा जिन्हें मंत्रिमंडल विस्तार में जगह नहीं मिल पाई और जो संगठन के पुराने और वफादार सिपाही हैं।
बता दें कि राजस्थान के कई आयोग हैं जहां हजारों की संख्या में आवेदन और शिकायतें पेंडिंग हैं। बोर्ड के बजट और नई योजनाओं पर मुहर नहीं लग पा रही है। यही नहीं बिना मुखिया के अधिकारी भी अपनी मनमर्जी चला रहे हैं।
पढ़ें ये खबरें
- तीजा-पोरा तिहार कार्यक्रम: CM साय बोले- तीजा-पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और कृषि परंपरा के प्रतीक
- ‘मोदी हमारा भाई है’ लखनऊ में गूंजा नया नारा; बासित अली का खुला चैलेंज- ‘सपा की साइकिल कर देंगे पंक्चर
- कांग्रेस विधायक के बेटे पर बस स्टाफ से मारपीट का आरोप, ओवरटेक को लेकर हुआ विवाद, वीडियो वायरल…
- कुत्ते ने काटा तो लगा दिया सांप का इंजेक्शन! संजय गांधी अस्पताल में फिर लापरवाही के आरोप, सीएम हेल्पलाइन में शिकायत
- ‘इज्जत दोगे तो लोगे… नाम तो पूरा शहर जानता है’, युवक को चप्पलों से पीटा, फिर वायरल किया Video, पुलिस को दी खुली चुनौती!


