Rajasthan News: जल जीवन मिशन घोटाले में फंसे पीएचईडी के पूर्व एडिशनल चीफ सेक्रेटरी सुबोध अग्रवाल को कोर्ट से करारा झटका लगा है। जयपुर की एसीबी कोर्ट ने पूर्व आईएएस की जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया।

एसीबी कोर्ट के जज राजेश कुमार दड़िया ने अपने आदेश में कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट में जो आरोप लगे हैं, उन्हें देखकर साफ लगता है कि इतने बड़े पद पर बैठे सरकारी अफसर ने अपने अधिकारों का जमकर गलत इस्तेमाल किया। हर घर नल से जल जैसी बेहद जरूरी योजना में आम जनता की भावनाओं और उनके भरोसे के साथ खिलवाड़ किया गया है। ऐसे मोड़ पर आरोपी को छोड़ना बिल्कुल ठीक नहीं होगा।
कोर्ट में सुबोध अग्रवाल के वकील ने उन्हें बेकसूर बताने के लिए कई तर्क दिए। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल ने तो सिर्फ 4 वर्क ऑर्डर को ही मंजूरी दी थी। जैसे ही विभाग को फर्जीवाड़े की भनक लगी, उन्होंने खुद पेमेंट रुकवाकर कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। वकील ने यह भी कहा कि मामले में चार्जशीट आ चुकी है और 100 से ज्यादा गवाह हैं, इसलिए केस चलने में लंबा वक्त लगेगा। उन्हें जेल में रखना ठीक नहीं है।
सरकारी वकील मंजूला जैन ने इन दलीलों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सुबोध अग्रवाल सिर्फ विभाग के मुखिया ही नहीं थे, बल्कि फाइनेंस कमेटी के अध्यक्ष भी थे। उनके पास दोहरी जिम्मेदारी थी। उनके सामने इस पूरे फर्जीवाड़े की कई शिकायतें आईं, लेकिन उन्होंने सब कुछ जानकर भी जानबूझकर उन्हें नजरअंदाज कर दिया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने पूर्व आईएएस को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया।
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