Rajasthan News: राजस्थान की सियासत के दो उभरते चेहरे, लाडनूं विधायक मुकेश भाकर और शाहपुरा विधायक मनीष यादव के लिए कोर्ट से बड़ी खुशखबरी आई है। जयपुर महानगर प्रथम की एडीजे-9 कोर्ट ने 12 साल पुराने एक मामले में दोनों विधायकों समेत 9 लोगों को बाइज्जत बरी कर दिया है। जज प्रेम रतन ओझा ने निचली अदालत के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें इन्हें दोषी माना गया था।

क्या था विवाद?
दरअसल, यह पूरा मामला छात्र राजनीति के दौर का है। आरोप था कि 13 अगस्त 2014 को राजस्थान विश्वविद्यालय (RU) के मुख्य द्वार के बाहर जेएलएन मार्ग पर इन नेताओं ने लगभग 20 मिनट के लिए चक्काजाम किया था। पुलिस ने इसे सार्वजनिक रास्ते में बाधा माना और 2016 में इनके खिलाफ चालान पेश किया। करीब 10 महीने पहले एसीजेएम-19 कोर्ट ने इन्हें एक-एक साल की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ विधायकों ने अपील दायर की थी, जिस पर अब फैसला आया है।
जांच अधिकारी का बयान ही नहीं हुआ
मामले की पैरवी कर रहे वकील जितेंद्र भाकर ने अदालत में जोरदार तर्क दिए। उन्होंने बताया कि निचली अदालत ने बिना किसी ठोस आधार के सजा सुना दी थी। पूरे ट्रायल के दौरान जांच अधिकारी (IO) का बयान तक दर्ज नहीं किया गया। केवल तीन पुलिसकर्मियों के बयानों के आधार पर सजा सुनाना कानूनन सही नहीं है। कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए सभी की अपील मंजूर कर ली।
अभिषेक चौधरी समेत ये 9 लोग भी हुए दोषमुक्त
राहत पाने वालों में सिर्फ विधायक ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के अन्य युवा नेता भी शामिल हैं। कोर्ट ने एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस प्रत्याशी रहे अभिषेक चौधरी, राजेश मीणा, रवि किराड़, वसीम खान, द्रोण यादव, भानूप्रताप सिंह और विद्याधर मील को भी बरी कर दिया है।
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