Rajasthan News: जयपुर के सी-स्कीम स्थित राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) दफ्तर के बाहर आज जमकर हंगामा हुआ। विदेश से डाक्टरी की पढ़ाई करके लौटे दर्जनों छात्रों ने काउंसिल के दफ्तर को चारों तरफ से घेर लिया।

छात्रों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि परीक्षा पास करने के बाद भी उन्हें भारत में इलाज करने का लाइसेंस यानी परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं दिया जा रहा है। गुस्साए डॉक्टरों ने रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोयल और चेयरमैन डॉ. जगदीश मोदी के कमरे के बाहर जमकर नारेबाजी की। मामला बढ़ता देख मौके पर पुलिस को भी बुलाना पड़ा।

ऑनलाइन क्लास के नाम पर अटकाया खेल

हंगामा कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे रूस और यूक्रेन जैसे देशों से अपनी MBBS की पढ़ाई पूरी करके आए हैं। भारत में प्रैक्टिस करने के लिए उन्होंने नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) की सबसे कठिन FMGE परीक्षा भी पास कर ली है। लेकिन अब RMC के अफसर यह बहाना बना रहे हैं कि कोरोना के समय इन छात्रों ने कुछ महीने ऑनलाइन पढ़ाई की थी। छात्रों का कहना है कि जब दिल्ली से एनएमसी ने हरी झंडी दे दी है, तो समस्या कहां आ रही है।

अपनों को फायदा, बाकियों के लिए नो एंट्री?

प्रदर्शन कर रहे डॉ. सर्वेश बुगालिया ने बताया कि अप्रैल के महीने में ही इसी दफ्तर से 10 से ज्यादा ऐसे डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन चुपचाप कर दिया गया, जिन्होंने ऑनलाइन क्लास ली थी। छात्रों का सीधा आरोप है कि रसूखदारों और जान-पहचान वालों को पिछले दरवाजे से लाइसेंस बांटे जा रहे हैं, जबकि आम छात्रों को महीनों से चक्कर कटवाए जा रहे हैं। बता दें कि कुछ समय पहले ही एसओजी (SOG) ने पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा को घूस लेकर फर्जी रजिस्ट्रेशन करने के मामले में जेल भेजा था।

इस पूरे विवाद पर आरएमसी के रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोयल का पक्ष भी सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि छात्रों पर लगे आरोप सही नहीं हैं। उन्होंने बताया कि कुछ छात्रों ने छह महीने तो कुछ ने साल-दो साल तक ऑनलाइन पढ़ाई की है। इतने लंबे समय तक घर बैठे पढ़ाई करने वालों को सीधे मरीजों के इलाज की छूट नहीं दी जा सकती। उन्होंने दिल्ली मुख्यालय से इस पर गाइडलाइन की मांग की है।

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