Rajasthan News: जयपुर के भैराणा स्थित दादूदयाल धाम में पिछले कई दिनों से चल रहे संतों के आंदोलन में अचानक एक बड़ा मोड़ आ गया है। करीब 500 साल पुरानी पवित्र तपोस्थली को बचाने के लिए चल रहा संतों का अनशन फिलहाल रोक दिया गया है। 15 अप्रैल से संत यहां कड़ी भूख हड़ताल पर बैठे थे। अब संतों ने साफ कर दिया है कि वे सरकार से बातचीत के जरिए रास्ता निकालने को तैयार हैं।

श्री दादूपालक भैराणा धाम संघर्ष समिति ने इस फैसले को लेकर एक लेटर जारी किया है। संतों का कहना है कि प्रशासन के बड़े अधिकारियों और सरकार से मिले भरोसे के बाद यह कदम उठाया गया है।
पूरी तरह नहीं सुलझा है मामला
संतों ने भले ही अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी हो, लेकिन तपोस्थली को लेकर पेंच अभी भी फंसा हुआ है। दरअसल, 26 मई को जयपुर जिला कलेक्टर और प्रशासन के आला अफसरों के साथ संतों की एक लंबी बैठक हुई थी। इस बैठक में कई बातों पर सहमति बनी थी।
प्रशासन ने वहां से रीको (RIKO) को हटाने और एक स्पेशल कमेटी बनाने की बात कही थी। लेकिन संतों का कहना है कि यह कमेटी कैसे काम करेगी और इसके पास क्या अधिकार होंगे, यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है। इसके लिए थोड़ा और वक्त मांगा गया है।
संतों की नाराजगी और सीएम पर भरोसा
27 मई को आंदोलन के दौरान कुछ नेताओं की तरफ से संतों को लेकर बयानबाजी की गई थी। इससे संत समाज काफी नाराज है। संतों ने साफ कहा कि वे किसी विकास के विरोधी नहीं हैं। वे तो बस पर्यावरण और अपनी आस्था को बचाना चाहते हैं।
आंदोलन से जुड़े मुख्य बिंदु
आपको बता दें कि तपोस्थली के संरक्षण को लेकर यह पूरा विवाद 5 अप्रैल से शुरू हुआ था। मांगें पूरी न होने पर 15 अप्रैल से संत आमरण अनशन पर बैठ गए थे। अब संत समाज प्रशासन के साथ मिलकर एक-एक बिंदु पर आमने-सामने बैठकर चर्चा करेगा।
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