Rajasthan News: अजमेर के बोराड़ा में पूर्व सरपंच के परिवार का जो नरसंहार हुआ, उसने सबको हिलाकर रख दिया है। जिसे पहले लोग सिर्फ एक कार हादसा समझ रहे थे, वो असल में अपनों की ही खूनी साजिश निकली। पुलिस की जांच में जो सच सामने आया है, उसे सुनकर पुलिस के भी होश उड़ गए।

इस पूरे सामूहिक हत्याकांड का मास्टरमाइंड कोई बाहरी नहीं, बल्कि रामसिंह का खुद का सगा नाबालिग बेटा निकला। उसने अपनी सगी मां सुनीता और बहन के साथ मिलकर इस खूनी खेल को अंजाम दिया।

आधी रात को मोबाइल पर गेम और फिर पहली चीख

कासिर रोड पर बने इस सुनसान फार्म हाउस में यह बड़ा परिवार रहता था। आसपास कोई दूसरा मकान नहीं था। बुधवार 27 मई की शाम को रामसिंह दो बियर की बोतलें लेकर घर आया था। बियर पीने के बाद रामसिंह और उसकी दूसरी पत्नी सुरज्ञान अपने कमरे में सोने चले गए। बाकी लोग भी सो चुके थे।

लेकिन रामसिंह का नाबालिग बेटा जाग रहा था। वो मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलने का नाटक करते हुए अपने पिता के गहरी नींद में जाने का इंतजार कर रहा था। रात के करीब 2 बजे जब चारों तरफ सन्नाटा पसर गया, तो वो दबे पांव पिता के कमरे में घुसा। उसने सीधे रामसिंह के कान के पास चाकू से तगड़ा वार किया। रामसिंह बिना चीखे ही मर गया।

रामसिंह को मारते ही पास सो रही दूसरी पत्नी सुरज्ञान की आंख खुल गई। उसने हिम्मत दिखाकर लड़के से चाकू छीन लिया और शोर मचाने लगी। तभी प्लानिंग के मुताबिक पहली पत्नी सुनीता और उसकी बेटी भी कमरे में आ गईं। तीनों ने मिलकर सुरज्ञान को दबोचा और उसका गला रेत दिया।

आवाज सुनकर पास के कमरे से रामसिंह की बुजुर्ग मां पूसी देवी और 30 साल की भांजी महिमा भी वहां आ गईं। महिमा ने जैसे ही खून से लथपथ लाशें देखीं, वो चिल्लाने लगी। पकड़े जाने के डर से तीनों ने महिमा पर भी ताबड़तोड़ वार कर दिए। इसके बाद बुजुर्ग दादी पूसी देवी को भी रास्ते से हटा दिया गया।

इस एक लड़की से थी सबसे ज्यादा नफरत

पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी परिवार रामसिंह की भांजी महिमा से बेहद नफरत करता था। महिमा अविवाहित थी और मामा रामसिंह के साथ ही रहती थी। रामसिंह के जमीन के सारे सौदे महिमा ही देखती थी। बैंक खातों का संचालन और लेन-देन का हिसाब भी उसी के पास था। सुनीता और उसके बच्चों को लगता था कि महिमा उनकी सारी संपत्ति हड़प लेगी।

स्कॉर्पियो में लाशें भरकर लगा दी आग

चार कत्ल करने के बाद सुबह के करीब 4 बजे सबूत मिटाने का काम शुरू हुआ। चारों लाशों को घसीटकर रामसिंह की ही स्कॉर्पियो गाड़ी में ठूंस दिया गया। आरोपी लड़का खुद गाड़ी चलाकर फार्म हाउस से 500 मीटर दूर ले गया। वहां उसने डीजल छिड़ककर गाड़ी को आग लगा दी ताकि सब इसे एक्सीडेंट समझें।

इसके बाद आरोपी चुपचाप घर आ गए और सुबह रोने का नाटक करने लगे। पुलिस को शक तब हुआ जब आरोपी बेटा सुबह घर के बाहर बेहद सामान्य होकर चाय पी रहा था। पुलिस ने जब कड़ाई से पूछताछ की, तो साज़िश की सारी परतें खुल गईं।

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