Rajasthan News: जयपुर के सुनियोजित विकास की दिशा में जयपुर विकास प्राधिकरण जेडीए ने एक और अहम कदम बढ़ाया है। राज्य की पहली लैंड पूलिंग योजना के सफल क्रियान्वयन के बाद जेडीए अब राजस्थान के अन्य विकास प्राधिकरणों और नगर विकास न्यासों के लिए रोल मॉडल बनकर उभरा है।

जेडीए के मंथन सभागार में शुक्रवार को आयोजित एक विशेष ओरिएंटेशन कार्यशाला में जयपुर मॉडल को प्रदेश के अन्य जिलों के अधिकारियों के साथ साझा किया गया। राज्य सरकार की मंशा है कि जयपुर की तर्ज पर अन्य जिलों में भी लैंड पूलिंग योजना लागू की जाए जिससे शहरी विकास को सुनियोजित और संतुलित बनाया जा सके। इस उद्देश्य से अजमेर, भरतपुर, उदयपुर और बीकानेर विकास प्राधिकरणों के साथ-साथ भीलवाड़ा और अलवर नगर विकास न्यास के वरिष्ठ अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला से जुड़े।
जेडीए की अतिरिक्त आयुक्त एवं लैंड पूलिंग अधिकारी प्रतिभा पारीक ने बताया कि लैंड पुलिंग योजना में किसानों और खातेदारों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। राजस्थान लैंड पूलिंग योजना अधिनियम 2016 के तहत टोंक रोड क्षेत्र के शिवदासपुरा, बरखेड़ा और चंदलाई गांवों में करीब 163 हेक्टेयर भूमि पर यह महत्वाकांक्षी योजना विकसित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भूमि देने वाले खातेदारों को उनकी कुल भूमि का 45 प्रतिशत हिस्सा विकसित भूमि के रूप में वापस मिलेगा। इससे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा और उनकी भूमि का मूल्य भी कई गुना बढ़ेगा। इसके साथ ही आधुनिक नगर नियोजन को ध्यान में रखते हुए चौड़ी सड़कों, पाकों, हरित क्षेत्रों और जनसुविधाओं के लिए पर्याप्त स्थान आरक्षित किया गया है।
कार्यशाला में मौजूद अधिकारियों ने माना कि यह मॉडल न केवल किसानों के लिए लाभकारी है, बल्कि शहरों के अनियंत्रित विस्तार को रोकने में भी सहायक साबित होगा। जेडीए के इस सफल प्रयोग के बाद अब अन्य जिलों में भी लैंड पूलिंग योजनाएं लाने की तैयारी शुरू हो गई है।
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