Rajasthan News: राजस्थान की न्यायिक राजधानी जोधपुर को देश के फिनटेक नक्शे पर लाने का सपना अब टूटता नजर आ रहा है। जिस प्रोजेक्ट को लेकर दावा किया गया था कि यह प्रदेश के युवाओं की तकदीर बदल देगा, वह आज सियासत और बजट की खींचतान में फंसकर रह गया है। आलम यह है कि 672 करोड़ के इस भारी-भरकम प्रोजेक्ट की रफ्तार अब कछुआ चाल से भी सुस्त हो चुकी है।

60% काम के बाद ब्रेक, खंडहर बनने की कगार पर संस्थान
मिली जानकारी के अनुसार फिनटेक इंस्टीट्यूट का करीब 60 प्रतिशत ढांचा तो खड़ा हो गया है, लेकिन उसके आगे ईंट रखने वाला कोई नहीं है। बजट 2021-22 की इस बड़ी घोषणा को पहले 400 करोड़ और फिर 672 करोड़ का बजट मिला, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि ताजा बजट में इसे महज 238 करोड़ देकर छोड़ दिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, फंड की अनिश्चितता के कारण ठेकेदारों ने भी अब हाथ खींचने शुरू कर दिए हैं।
कुर्सी खाली, जिम्मेदारी से भागे अफसर
हैरानी की बात तो यह है कि इतने करोड़ों के प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग के लिए आज की तारीख में कोई जिम्मेदार अधिकारी तक तैनात नहीं है। पहले जिन अफसरों को यहां लगाया गया था, उन्हें हटा दिया गया और अब वहां केवल खाली कुर्सियां और धूल जमी फाइलें बची हैं। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर जबरदस्त आक्रोश है कि जब कोई अधिकारी ही नहीं है, तो काम की क्वालिटी और डेडलाइन कौन तय करेगा?
इन कोर्सेज पर लगा ग्रहण, युवाओं में मायूसी
अगर यह संस्थान समय पर खुलता, तो जोधपुर के युवाओं को दिल्ली-मुंबई भागने की जरूरत नहीं पड़ती। यहां कई आधुनिक कोर्स शुरू होने वाले थे, जो अब ठंडे बस्ते में जाते दिख रहे हैं जैसे डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन और क्रिप्टोकरेंसी मैनेजमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी और डेटा एनालिटिक्स।
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