लखनऊ. आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बहुचर्चित 68500 सहायक शिक्षक भर्ती और 69000 सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगतियों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है. उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुतियों को लागू करने और सुप्रीम कोर्ट में अभ्यर्थियों के पक्ष में सकारात्मक रुख अपनाने की मांग की है.

राज्यसभा सांसद ने कहा कि 2018 की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के ओबीसी और दिव्यांग अभ्यर्थी लंबे समय से न्याय मांग रहे हैं. उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने 5 जनवरी 2022 की अपनी संस्तुति को बरकरार रखते हुए 16 जून 2026 की बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया था. 9 जुलाई 2026 को प्रमुख सचिव (बेसिक शिक्षा) को भेजी गई संस्तुति में कहा गया है कि ओबीसी अभ्यर्थियों को 150 पूर्णांक में से 60 अंक (40 प्रतिशत) प्राप्त करने पर उत्तीर्ण माना जाए और उसी के अनुसार परिणाम संशोधित कर नियुक्ति दी जाए.

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संजय सिंह के अनुसार लगभग 23000 पद खाली हैं, जिनमें ओबीसी वर्ग के करीब 9000 पद शामिल हैं. बेसिक शिक्षा विभाग 7 वर्ष बीत जाने का हवाला देकर अभ्यर्थियों को लाभ से वंचित कर रहा है, जो असंवैधानिक है. पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि सहायक अध्यापक भर्ती 2019 और प्रधानाध्यापक भर्ती 2021 में ओबीसी को 5 प्रतिशत छूट दी गई, लेकिन 2018 की भर्ती में इसे नकारना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है.

सुप्रीम कोर्ट में सकारात्मक पक्ष रखने की अपील

वही संजय सिंह ने 69000 सहायक अध्यापक भर्ती का मुद्दा उठाया है. उन्होंने कहा कि 5 जनवरी 2022 को जारी 6800 आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की सूची आज तक अधर में है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 16 सितंबर (डायरी संख्या 38554/2024) को सुनवाई होनी है. उन्होंने मांग की कि सरकार अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से सकारात्मक विधिक पक्ष रखे. यदि 6800 अभ्यर्थियों की तत्काल नियुक्ति संभव न हो तो बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा बताए गए 4946 रिक्त पदों पर मेरिट डाउन कर ओबीसी और एससी अभ्यर्थियों का समायोजन किया जाए. साथ ही इनकी नियुक्ति 1 जून 2020 से प्रभावी मानी जाए, ताकि सेवा और वरिष्ठता के हित सुरक्षित रहें.

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युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश का युवा वर्षों से सड़कों पर लाठियां खा रहा है और सरकार संवैधानिक संस्थाओं के आदेशों की भी अनदेखी कर रही है. राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के स्पष्ट आदेशों के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग निष्क्रिय है. उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि विभाग को निर्देश जारी किए जाएं, ताकि योग्य युवाओं को अविलंब नियुक्ति और न्याय मिल सके.