Rajasthan OBC Reservation: राजस्थान में ओबीसी आयोग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपे जाने के बाद पंचायत और निकाय चुनाव में आरक्षण को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भजनलाल सरकार पर ओबीसी आरक्षण कम करने और पिछड़े वर्गों को आपस में लड़ाने की साजिश का आरोप लगाया है। वहीं, संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आयोग ने जमीनी स्तर पर अध्ययन के बाद रिपोर्ट तैयार की है और इसी के आधार पर पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय किया जाएगा।

92 ओबीसी जातियों पर तैयार हुई करीब 1000 पन्नों की रिपोर्ट
पंचायत और निकाय चुनावों को देखते हुए ओबीसी आयोग ने प्रदेश के पिछड़े वर्गों की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक स्थिति का अध्ययन किया। करीब 900 से 1000 पन्नों की इस रिपोर्ट में ओबीसी वर्ग की राजनीतिक भागीदारी और अलग-अलग जातियों को मिले प्रतिनिधित्व का अध्ययन किया गया है।
राजस्थान की कुल 92 ओबीसी जातियों में से करीब 11 जातियों को राजनीतिक स्तर पर अपेक्षाकृत अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की बात सामने आई है। आयोग ने केवल आबादी को आधार नहीं बनाया है। सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक पिछड़ेपन को भी अध्ययन का हिस्सा बनाया गया है।
रिपोर्ट में राजनीतिक प्रतिनिधित्व तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुझाए गए मापदंडों को आधार बनाने की सिफारिश किए जाने की बात भी सामने आई है।
डोटासरा ने उठाया रिपोर्ट लीक होने का सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बीजेपी सरकार आरएसएस के इशारे पर ओबीसी आरक्षण का दायरा कम करने की तैयारी कर रही है। डोटासरा ने आशंका जताई कि पंचायत और निकाय चुनाव में कुछ जगहों पर ओबीसी का मौजूदा 21 प्रतिशत आरक्षण घटाकर 5 प्रतिशत तक सीमित किया जा सकता है।
उन्होंने रिपोर्ट लीक होने का सवाल भी उठाया। डोटासरा का कहना है कि जब आयोग की रिपोर्ट अभी आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं हुई है, तो इसके आंकड़े और अलग-अलग जातियों से जुड़ा डेटा मीडिया में कैसे सामने आ रहा है?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से पूरी रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर राजस्थान में ओबीसी आबादी करीब 55 प्रतिशत है तो सरकार को 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा हटाने पर विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक इससे ओबीसी के साथ एससी और एसटी वर्ग को भी आरक्षण का लाभ बढ़ सकता है।
जोगाराम पटेल बोले, डोटासरा कर रहे गलत बयानबाजी
कांग्रेस के आरोपों पर संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने पलटवार किया है। उन्होंने डोटासरा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे गलत बयानबाजी कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि ओबीसी आयोग ने कोई राजनीतिक फैसला नहीं किया है। आयोग ने लंबे समय तक जमीनी स्तर पर अध्ययन और मेहनत के बाद रिपोर्ट तैयार की है। पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करने के लिए इसी रिपोर्ट को आधार बनाया जाएगा।
पंचायत और निकाय चुनाव पर पड़ेगा असर
अब सबसे बड़ा सवाल रिपोर्ट की सिफारिशों और पंचायत व निकाय चुनाव में आरक्षण के नए समीकरण को लेकर है। अगर रिपोर्ट के आधार पर मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में बदलाव होता है तो इसका असर बड़ी संख्या में पंचायतों और स्थानीय निकायों की सीटों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि राजनीतिक दलों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। रिपोर्ट कब सार्वजनिक होती है और उसकी सिफारिशों को किस तरह लागू किया जाता है, यह राजस्थान की स्थानीय चुनावी राजनीति के लिए अहम होगा।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट अब महज प्रशासनिक दस्तावेज नहीं रह गई है। इसके साथ पंचायत और निकाय चुनाव के आरक्षण का सवाल जुड़ गया है, जिससे यह राजस्थान की आगामी चुनावी राजनीति का बड़ा मुद्दा बनती दिखाई दे रही है।
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