Rajasthan Politics: राजस्थान की सियासत में इस वक्त सबसे बड़ी हलचल राज्यसभा चुनाव को लेकर शुरू हो गई है। दिल्ली से लेकर जयपुर तक बड़े नेताओं के बीच बैठकों का दौर जारी है। चुनाव के लिए बाकायदा अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, बीजेपी सांसद राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस सांसद नीरज डांगी का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है।

खाली हो रही इन 3 सीटों में से 2 पर बीजेपी और 1 सीट पर कांग्रेस का कब्जा होना तय माना जा रहा है। पर्चा भरने की आखिरी तारीख 8 जून है। समय बहुत कम है, लेकिन दोनों ही खेमों ने अभी तक अपने पत्तों को छिपाकर रखा है।

ये है विधानसभा का गणित

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP): 118 विधायक
  • कांग्रेस (INC): 67 विधायक
  • भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP): 4 विधायक
  • बहुजन समाज पार्टी (BSP): 2 विधायक
  • राष्ट्रीय लोक दल (RLD): 1 विधायक
  • निर्दलीय: 8 विधायक

सूत्रों की मानें तो बीजेपी के भीतर शुरुआत में इस बात पर माथापच्ची हुई थी कि क्या तीसरी सीट पर भी अपना बंदा उतारा जाए या किसी निर्दलीय को आगे करके खेल किया जाए। हालांकि, जयपुर से आ रही खबरों के मुताबिक अब इस प्लान को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। पार्टी का पूरा ध्यान ओबीसी और सामान्य वर्ग के समीकरणों को साधने पर टिक गया है।

बीजेपी के पाले से कौन मार सकता है बाजी?

बीजेपी में दावेदारों की लाइन बहुत लंबी है, लेकिन दो नामों का वजन सबसे ज्यादा लग रहा है। पहले हैं पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, जो बंगाल के भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी की जीत के बड़े रणनीतिकार रहे हैं। दूसरा बड़ा नाम सतीश पूनिया का है। हरियाणा में बीजेपी की सरकार दोबारा बनवाने के बाद दिल्ली के दरबार में पूनिया का नंबर काफी ऊपर चल रहा है। चर्चा तो यह भी है कि पूनिया को दिल्ली भेजकर मोदी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

इसके अलावा महिलाओं और जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर अलका गुर्जर और पूर्व सांसद जसकौर मीणा की बेटी अर्चना मीणा के नाम पर भी दिल्ली में मंथन चल रहा है। वहीं गुर्जर समाज के एक बड़े वोटबैंक को अपने पाले में बनाए रखने के लिए कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के परिवार से विजय बैंसला या उनकी बहन सुनीता बैंसला को भी मौका मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

कांग्रेस के खेमे में सोशल इंजीनियरिंग का दांव

उधर कांग्रेस पार्टी इस बार किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। गोविंद सिंह डोटासरा, अशोक गहलोत और सचिन पायलट जैसे बड़े नेता पहले से ही ओबीसी चेहरे के तौर पर जमे हुए हैं। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के जरिए पार्टी एससी वर्ग को संदेश दे चुकी है। अब सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस बार किसी सामान्य वर्ग, एसटी या अल्पसंख्यक चेहरे को मौका देकर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है।

इस रेस में सबसे आगे विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी का नाम चल रहा है। जानकारों का कहना है कि सीपी जोशी को दिल्ली भेजने से कांग्रेस केंद्र में मजबूत होगी और राजस्थान के वागड़-मेवाड़ इलाके में अपनी खोई हुई जमीन वापस पा सकेगी। इनके साथ ही राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रेहाना रियाज का नाम भी रेस में लगातार बना हुआ है। अब देखना यह है कि 8 जून से पहले दोनों पार्टियां किस नाम पर अपनी मुहर लगाती हैं।

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