Rajasthan Politics: अजमेर में मीना विकास एवं शोध संस्थान के एक कार्यक्रम में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अपने राजनीतिक जीवन, संघर्ष और समाज के प्रति जिम्मेदारी पर खुलकर विचार रखे। उन्होंने कहा कि समरावता कांड के दौरान गिरफ्तार बच्चों से वे जेल में मिलने गए थे। वहां उन्हें फटकार भी सुननी पड़ी, लेकिन संकट के समय समाज के भाई-बहनों के साथ खड़ा होना उनका फर्ज है।

किरोड़ी लाल मीणा ने साफ कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा सेवा मायने रखती है। जरूरत पड़ी तो मंत्री पद चला जाएगा, लेकिन वे समाज के साथ खड़े रहेंगे।
कांग्रेस शासन में जेल जाना पड़ा
कृषि मंत्री ने दो टूक कहा कि जब तक उनके शरीर में प्राण हैं, तब तक आरक्षण को कोई खत्म नहीं कर सकता। यूजीसी से जुड़े मुद्दे पर उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाई है और विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने के बाद केंद्र सरकार नया फैसला ले सकती है। कांग्रेस शासनकाल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौर में उन्हें गिरफ्तार किया गया, जेल जाना पड़ा और कई तरह के अत्याचार भी झेलने पड़े।
RPSC पेपर लीक पर सरकार की कार्रवाई
RPSC पेपर लीक मामलों पर बोलते हुए किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि पिछली सरकार में 19 में से 17 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए थे। वहीं वर्तमान सरकार में 63 सब-इंस्पेक्टर और RPSC के सदस्य जेल भेजे गए हैं, जिससे अब पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों में बड़े नाम शामिल हैं और सिर्फ आदिवासियों पर कार्रवाई कर मामला खत्म नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक सफर और संस्कृति पर बात
अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए किरोड़ी ने कहा कि पार्टी ने कई बार टिकट काटा, लेकिन उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीतकर जनता का भरोसा कायम रखा। उन्होंने कहा कि आज राजनीति व्यवसाय बनती जा रही है, जबकि उनके लिए राजनीति सेवा का माध्यम है। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के साथ पारंपरिक नृत्य करते हुए उन्होंने कहा कि नाच-गान हमारी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है, जिसे जीवित रखना जरूरी है। साथ ही उन्होंने माताओं-बहनों से अपील की कि बच्चों में संस्कार डालने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी परिवार की होती है।
हनुमान बेनीवाल विवाद पर सफाई
हनुमान बेनीवाल से जुड़े पुराने विवाद पर किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि उन्होंने इस मामले को कभी गंभीरता से नहीं लिया। यह पूरी तरह पारिवारिक मामला था, जिसमें कुछ मतभेद सामने आए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर उनकी हनुमान बेनीवाल से कोई व्यक्तिगत बातचीत नहीं हुई है। कृषि मंत्री ने कहा कि राजनीति में ऐसे छोटे-मोटे मतभेद हो जाते हैं और भविष्य में यदि बातचीत होगी तो समाधान संवाद के जरिए ही निकाला जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।
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