Rajasthan Power Crisis: राजस्थान के तापीय बिजलीघरों में कोयले का संकट गहराने लगा है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के सात थर्मल पावर प्लांटों में निर्धारित नॉर्मेटिव स्टॉक का औसतन सिर्फ 23 फीसदी कोयला बचा है। इनमें पांच प्लांट क्रिटिकल श्रेणी में पहुंच चुके हैं। 26 अगस्त को इन प्लांटों में करीब 74 हजार टन कोयला आया, जबकि खपत करीब 93 हजार टन रही। यानी एक दिन में आवक से करीब 19 हजार टन ज्यादा कोयला खर्च हो गया।

देश के 190 तापीय बिजलीघरों में से 45 में भी कोयले का स्टॉक गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। इन प्लांटों में तय जरूरत का 25 फीसदी या उससे कम कोयला बचा है। राजस्थान के सात सरकारी थर्मल प्लांटों की स्थिति राष्ट्रीय औसत से भी कमजोर है। देश के तापीय बिजलीघरों में औसत कोयला स्टॉक करीब 50 फीसदी है।

सात प्लांटों में सिर्फ 5.04 लाख टन कोयला

राजस्थान के इन सात प्लांटों की कुल उत्पादन क्षमता 7,580 मेगावाट है। 85 फीसदी प्लांट लोड फैक्टर के आधार पर इन्हें रोजाना करीब 1.04 लाख टन कोयले की जरूरत होती है। इन प्लांटों के लिए नॉर्मेटिव कोयला स्टॉक करीब 21.87 लाख टन निर्धारित है। इसके मुकाबले फिलहाल सिर्फ 5.04 लाख टन कोयला उपलब्ध है।

कोटा थर्मल में स्टॉक 26 फीसदी

कोटा थर्मल पावर प्लांट में नॉर्मेटिव स्टॉक के मुकाबले सिर्फ 26 फीसदी कोयला बचा है। प्लांट को करीब 3.91 लाख टन कोयले की जरूरत है, जबकि उपलब्ध स्टॉक करीब 1.01 लाख टन है। यह क्रिटिकल सीमा से सिर्फ एक फीसदी ऊपर है। यूनिट संख्या 3 और 6 फिलहाल बंद हैं। अधिकारियों के मुताबिक दोनों यूनिट रखरखाव के कारण बंद हैं। इससे पहले यूनिट संख्या 5 को जुलाई में भी कई दिन बंद रखा गया था। कोटा थर्मल की मुख्य अभियंता शिखा अग्रवाल के मुताबिक बारिश के कारण कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई है, लेकिन फिलहाल पर्याप्त कोयला उपलब्ध है।

कालीसिंध में 21 फीसदी स्टॉक, यूनिट में ब्लास्ट

झालावाड़ के 1200 मेगावाट क्षमता वाले कालीसिंध थर्मल पावर स्टेशन में नॉर्मेटिव स्टॉक करीब 3.36 लाख टन है। इसके मुकाबले सिर्फ 69 हजार टन कोयला उपलब्ध है। यानी स्टॉक 21 फीसदी रह गया है। 26 अगस्त को यहां 12 हजार टन कोयला पहुंचा, जबकि करीब 15 हजार टन की खपत हुई। प्लांट के अतिरिक्त मुख्य अभियंता महमूद अहमद ने बताया कि फिलहाल करीब एक सप्ताह का कोयला उपलब्ध है। फीडर में खराबी के कारण गुरुवार को एक यूनिट कुछ देर के लिए बंद करनी पड़ी। इसी बीच कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट की यूनिट संख्या 1 के बॉयलर फर्नेस में गुरुवार शाम जोरदार ब्लास्ट हो गया। धमाके के बाद यूनिट को तत्काल बंद कर दिया गया। हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्लांट को आर्थिक नुकसान हुआ है। गीले और घटिया गुणवत्ता वाले कोयले की लंबे समय से आपूर्ति होने की बात सामने आई है। इसी वजह से बॉयलर फर्नेस में ब्लास्ट की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, ब्लास्ट के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

सातों प्लांटों में कहां कितना कोयला?

बिजलीघरनॉर्मेटिव स्टॉक के मुकाबले उपलब्ध
छबड़ा सुपर क्रिटिकल20%
छबड़ा थर्मल पावर स्टेशन फेज-II21%
कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट21%
सूरतगढ़ 1500 मेगावाट23%
छबड़ा सुपर थर्मल पावर फेज-I25%
सूरतगढ़ 1320 मेगावाट25%
कोटा थर्मल पावर प्लांट26%

मांग बढ़ी, लेकिन कम आ रहा कोयला

छबड़ा थर्मल प्लांट के मुख्य अभियंता डीके मित्तल के मुताबिक करीब छह दिन का कोयला बचा है। मांग बढ़ी है, लेकिन आपूर्ति कम हो रही है। छबड़ा सुपर क्रिटिकल के मुख्य अभियंता केसी सिंघल ने भी जरूरत के मुकाबले कम कोयला मिलने की बात कही है। उनके मुताबिक अतिरिक्त रैक नहीं आ रही हैं। कोटा थर्मल की मुख्य अभियंता शिखा अग्रवाल ने बारिश के कारण आपूर्ति प्रभावित होने की बात कही है। फिलहाल प्लांट में उपलब्ध स्टॉक को पर्याप्त बताया गया है।

आवक से ज्यादा हो रही खपत

राजस्थान के सातों सरकारी थर्मल प्लांटों में कोयले की दैनिक जरूरत करीब 1.04 लाख टन है। 26 अगस्त को इन सभी प्लांटों में करीब 74 हजार टन कोयला पहुंचा। उसी दिन करीब 93 हजार टन कोयले की खपत हुई। यानी जितना कोयला आया, उससे करीब 19 हजार टन ज्यादा इस्तेमाल हो गया। अगर आवक और खपत का यह अंतर बना रहता है तो स्टॉक पर दबाव और बढ़ सकता है।

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