Rajasthan Vidhansabha News: राजस्थान विधानसभा में अवैध खनन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सोमवार को छबड़ा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने विधानसभा में बारां जिले में अवैध खनन का मामला उठाते हुए अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लगाए। उन्होंने अंता, अटरू, बारां और किशनगंज विधानसभा क्षेत्रों में अवैध खनन की गतिविधियों का जिक्र किया, जिससे जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई।

कंवरलाल मीणा ने किया पलटवार
सिंघवी के बयान पर अंता विधायक कंवरलाल मीणा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस शासन में प्रमोद जैन भाया खनन मंत्री थे, तब बारां जिले में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हुआ, लेकिन उस समय सिंघवी ने कोई आवाज नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि अब जब पूरी तरह से वैध खनन हो रहा है, तो सरकार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
सिंघवी बोले- अवैध खनन से पर्यावरण पर खतरा
विधानसभा में बोलते हुए प्रताप सिंह सिंघवी ने कहा कि अवैध खनन से पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है। इससे जल स्रोतों, वन्य जीवों और कृषि योग्य भूमि को भी क्षति पहुंच रही है। भूमिगत जल स्तर में गिरावट और पर्यावरण असंतुलन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन की मिलीभगत के बिना अवैध खनन संभव नहीं है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
छीपाबड़ौद में हो रहा अवैध खनन
विधायक कंवरलाल मीणा ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि छीपाबड़ौद क्षेत्र, जो कि सिंघवी के क्षेत्र में आता है, वहां भारी मात्रा में अवैध खनन हो रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने अवैध खनन पर लगाम लगाई है और अब खनन पूरी तरह से कानूनी रूप से हो रहा है। छोटे-मोटे गरीब लोग अगर कहीं खुदाई कर रहे हैं, तो उसे अवैध नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को लेकर वे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से शिकायत करेंगे।
अवैध खनन का मुद्दा रहा विवादों में
बारां जिले में अवैध खनन का मामला पहले भी सुर्खियों में रहा है। पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया और सांगोद के पूर्व विधायक भरत सिंह के बीच इस मुद्दे पर कई बार विवाद हुआ था। भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद भाया और उनके कई सहयोगियों के खिलाफ अवैध खनन से जुड़े मुकदमे दर्ज हुए, लेकिन अब तक इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई सियासत
बारां जिले में अवैध खनन का मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका है। भाजपा के भीतर ही इस मुद्दे को लेकर विधायकों में मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। विधानसभा में इस मुद्दे पर हुई तीखी बहस से साफ है कि आने वाले समय में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
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