हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राखीगढ़ी ऐतिहासिक स्थल पर बन रहे विश्वस्तरीय म्यूजियम की समीक्षा की है। उन्होंने अधिकारियों को इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने और 5 हजार साल पुरानी सभ्यता को जीवंत करने के निर्देश दिए हैं।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हिसार स्थित विश्व प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल राखीगढ़ी में विकसित किए जा रहे विश्वस्तरीय साइट म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा का ऐसा वैश्विक केंद्र बने, जहां दुनिया भारत के गौरवशाली इतिहास को करीब से जान सके।

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि संग्रहालय का उद्देश्य केवल पुरातात्विक अवशेषों को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि हजारों वर्ष पुरानी भारतीय सभ्यता को आधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत रूप में नई पीढ़ी और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों तक पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संग्रहालय में प्राचीन काल के अखंड भारत का स्वरूप और सरस्वती-सिंधु सभ्यता का विस्तार भी प्रभावी तरीके से प्रदर्शित किया जाए, ताकि पर्यटक उस दौर की सांस्कृतिक और भौगोलिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि लगभग एक लाख वर्ग फुट क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इस इंटरप्रिटेशन सेंटर और साइट म्यूजियम में अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक, ऑडियो-विजुअल सिस्टम, 3D प्रोजेक्शन और इंटरैक्टिव डिस्प्ले का उपयोग किया जाएगा। यहां आने वाले पर्यटक केवल पुरातात्विक अवशेष नहीं देखेंगे, बल्कि उस दौर की जीवनशैली, नगर नियोजन, जल प्रबंधन, व्यापार, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विकास को आधुनिक तकनीक के माध्यम से वास्तविक अनुभव के रूप में महसूस कर सकेंगे।

संग्रहालय में ग्राउंड फ्लोर और प्रथम तल पर 10 विषय आधारित गैलरियां बनाई जाएंगी। इनमें राखीगढ़ी के सातों टीलों, विभिन्न चरणों में हुए उत्खनन, प्राप्त दुर्लभ पुरावशेषों, आवास व्यवस्था, जल निकासी प्रणाली, अन्न भंडारण, व्यापारिक गतिविधियों और तकनीकी उपलब्धियों को वैज्ञानिक एवं आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। ओरिएंटेशन गैलरी में सरस्वती-सिंधु सभ्यता और सप्त नदियों के इतिहास को भी विस्तार से दर्शाया जाएगा।

बच्चों और युवाओं के लिए संग्रहालय को पूरी तरह अनुभवात्मक बनाया जाएगा। यहां प्राचीन काल की मुहर (सील) बनाने की प्रक्रिया, ऐतिहासिक ईंटों और पुरावशेषों की प्रतिकृतियों को देखने-समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही उस दौर के पारंपरिक खेल और सहभागिता आधारित गतिविधियां भी विकसित की जाएंगी, ताकि इतिहास को रोचक और व्यावहारिक तरीके से समझाया जा सके।

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्तमान में राखीगढ़ी के तीन टीलों पर पुरातात्विक उत्खनन जारी है। संग्रहालय में उत्खनन के विभिन्न चरणों और उनसे मिली ऐतिहासिक खोजों को भी विस्तार से प्रदर्शित किया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग-152 के निकट स्थित होने के कारण भविष्य में राखीगढ़ी देश के प्रमुख पर्यटन, सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्रों में शामिल होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

बैठक में यह भी बताया गया कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए 90 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इस राशि से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा आगंतुकों के लिए शेड सहित आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा, ताकि पर्यटकों को सुरक्षित और बेहतर अनुभव मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार का लक्ष्य राखीगढ़ी को विश्व मानचित्र पर भारत की प्राचीन सभ्यता के सबसे सशक्त प्रतीक के रूप में स्थापित करना है, जहां इतिहास केवल प्रदर्शित नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत होकर पूरी दुनिया को भारत की गौरवशाली विरासत से परिचित कराएगा।