अयोध्या. राम मंदिर चढ़ावे का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. अब इस मामले में मंदिर ट्रस्ट ने सीएम योगी से मामले की जांच एसआईटी (SIT) कराने की मांग की है. वहीं मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी ने ट्रस्ट और उसके महासचिव चंपत राय पर जो आरोप लगाए थे उसका चंपत राय ने खंडन करते हुए आरोपों को सिरे से नकार दिया है. पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने पूरे मामले को लेकर बड़ा खुलासा किया था. मीडिया को उन्होंने बताया कि मंदिर में चोरी कोई नई बात नहीं थी, यह रोजाना होती थी.
महिपाल के मुताबिक उन्होंने खुद चोरी पकड़ी थी. इसकी शिकायत राम मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और मेंबर गोपाल से की थी. लेकिन अगले ही दिन चंपत राय ने उन्हें हटा दिया. मंदिर में लगे CCTV कैमरों की 8 महीने पुरानी फुटेज डिलीट करवा दी गई. महिपाल का कहना है कि चंपत राय मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं में मनमर्जी चलाते हैं. विरोध करने पर व्यक्ति को हटा दिया जाता है. इन आरोपों को नकारते हुए चंपत राय ने कहा कि मंदिर में भक्तों के दान संग्रह, उसकी दैनिक गिनती, सुरक्षित परिवहन और अंततः अधिकृत बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत और पारदर्शी है. देश के प्रतिष्ठित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ अधिकारियों के साथ मंदिर के खातों का नियमित रूप से वित्तीय ऑडिट किया जाता है और अब तक की जांच में किसी भी प्रकार के बड़े वित्तीय गबन की कोई पुष्टि नहीं हुई है.
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बता दें कि विवाद बढ़ता देख मंदिर समिति ने खुद ही एक समिति बनाकर जांच शुरू कर दी है. लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि जिन पर आरोप लगे हैं उनकी जांच कितनी निष्पक्ष और सही होगी? इधर मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मंदिर के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के ही एक बड़े पदाधिकारी ने गिनती कक्ष में नए कैमरे लगाने का आंतरिक रूप से विरोध किया था. फिलहाल, ट्रस्ट का दावा है कि वर्ष 2024 से लेकर अब तक के पूरे वित्तीय संग्रह की गहन तकनीकी समीक्षा लगातार चल रही है और अभी तक कोई बड़ी विसंगति सामने नहीं आई है.

