Ramgarh Dam: राजस्थान के ऐतिहासिक रामगढ़ बांध के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने साफ कहा कि यदि सरकार 105 किलोमीटर दूर ईसरदा बांध से पानी लाने की परियोजना पर काम कर सकती है, तो बांध के आसपास महज 5 किलोमीटर के दायरे में फैले अतिक्रमण को हटाने में आखिर देरी क्यों हो रही है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति भुवन गोयल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पिछले कई वर्षों से केवल रिपोर्टें पेश की जा रही हैं, लेकिन जमीन पर अपेक्षित कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
2012 से सिर्फ रिपोर्टें आ रही हैं
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि वर्ष 2012 से इस मामले में लगातार रिपोर्टें दाखिल की जा रही हैं, लेकिन रामगढ़ बांध के संरक्षण के लिए ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि बांध क्षेत्र में कई फार्म हाउस विकसित हो चुके हैं, जहां कार्यक्रम और पार्टियां आयोजित होती हैं। इसके अलावा 2 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले एनिकट तोड़े जाने और प्राकृतिक जल प्रवाह के रास्ते प्रभावित होने की बात भी अदालत के सामने रखी गई।
105 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से लाया जाएगा पानी
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने अदालत को बताया कि ईसरदा बांध से करीब 105 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए रामगढ़ बांध तक पानी पहुंचाने की योजना पर काम चल रहा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने कहा कि यह परियोजना वर्ष 2028 तक पूरी होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि पहले पानी नहर के माध्यम से लाने की योजना थी, लेकिन तकनीकी और भौगोलिक बाधाओं के कारण अब पाइपलाइन का विकल्प चुना गया है। इस परियोजना का उपयोग पेयजल आपूर्ति के लिए भी किया जाएगा।
कैचमेंट क्षेत्र में अब भी अतिक्रमण
न्याय मित्र अधिवक्ता अभिनव शर्मा ने अदालत को बताया कि रामगढ़ बांध के कैचमेंट और जल बहाव क्षेत्र में अब भी बड़े पैमाने पर अतिक्रमण मौजूद है। उन्होंने कहा कि भूमि आवंटन निरस्त करने के लिए करीब 600 रेफरेंस भेजे जा चुके हैं, लेकिन उन पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि विराटनगर क्षेत्र की करीब 600 बीघा भूमि का नामांतरण पहले नाले की श्रेणी में किया गया था। वर्ष 2024 में इसे निरस्त कर दोबारा नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई।
जिला कलेक्टर को भी किया तलब
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि लंबित सभी रेफरेंस और उन पर की गई कार्रवाई का विस्तृत शपथपत्र अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत किया जाए। इसी के साथ ही जयपुर जिला कलेक्टर को भी अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।
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