भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) चंडीगढ़ द्वारा सोनीपत के मुरथल में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया है। बैठक में लघु ऋणकर्ताओं तक आसान लोन पहुंचाने और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी प्रगति की समीक्षा की गई है।

संजीव घनगस, सोनीपत। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) चंडीगढ़ द्वारा मुरथल के होटल पार्क ब्लू में पंजाब नेशनल बैंक, सोनीपत, पंजाब नेशनल बैंक सर्किल कार्यालय पानीपत तथा एसएलबीसी हरियाणा के समन्वय से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य लघु ऋणकर्ताओं तक ऋण की आसान एवं प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने, वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ बनाने तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक वास्तविक पहुंच का आकलन करना रहा है। बैठक में बताया गया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने हाल ही में आरबीआई के शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया था कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक पहुंचना बेहद जरूरी है।

ऋण पहुंच का जमीनी आकलन

मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप छोटे उधारकर्ताओं की ऋण आवश्यकताओं की पर्याप्त पूर्ति के जमीनी स्तर पर आकलन के लिए आरबीआई चंडीगढ़ ने विस्तृत अध्ययन हेतु सोनीपत एवं फरीदाबाद जिलों का विशेष चयन किया है। इस बैठक की अध्यक्षता आरबीआई चंडीगढ़ के क्षेत्रीय निदेशक विवेक श्रीवास्तव ने की है। इस विशेष अवसर पर आरबीआई के महाप्रबंधक पंकज सेतिया, मुख्य महाप्रबंधक आशीष चतुर्वेदी, एसएलबीसी हरियाणा के डीजीएम ओमकारनाथ झा, सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष सुमंत कुमार तथा पंजाब नेशनल बैंक, पानीपत सर्किल कार्यालय के उप सर्किल प्रमुख नवनीत बंसल सहित बैंकिंग क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे हैं।

डिजिटल इकोसिस्टम को बढ़ावा

इस बैठक में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (एससीबी), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी), गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) सहित सोनीपत जिले के सभी बैंक शाखा प्रबंधकों ने भाग लिया है। क्षेत्रीय निदेशक विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि आसान ऋण उपलब्ध होने से समावेशी आर्थिक विकास को गति मिलेगी, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा अनौपचारिक स्रोतों से ऋण लेने की निर्भरता कम होगी। उन्होंने सभी बैंक प्रतिनिधियों से प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा पात्र लाभार्थियों को समयबद्ध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके और डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा दिया जा सके।