दिल्ली के चर्चित लाल किला ब्लास्ट (Red Fort blast ) मामले में पटियाला हाउस स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने NIA को घटनास्थल से बरामद पीड़ितों और मुख्य आरोपी उमर उन नबी के जैविक अवशेषों biological remains) के निस्तारण की अनुमति दे दी है। विशेष अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जैविक अवशेषों के निस्तारण की पूरी प्रक्रिया मानव गरिमा बनाए रखते हुए और संबंधित धर्म की परंपराओं एवं रीति-रिवाजों का सम्मान करते हुए की जाए। अदालत ने माना कि मामले से जुड़े जैविक अवशेषों की अब जांच प्रक्रिया में आवश्यकता नहीं है। ऐसे में उन्हें विधि सम्मत तरीके से संरक्षित गरिमा के साथ अंतिम रूप से निस्तारित किया जा सकता है।

अदालत ने NIA को जैविक अवशेषों के निस्तारण की अनुमति देने के साथ ही कार्रवाई पूरी होने के बाद अनुपालन रिपोर्ट (कॉम्प्लायंस रिपोर्ट) भी अदालत में दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान एनआईए ने अदालत को बताया कि घटनास्थल से मिले पीड़ितों और मुख्य आरोपी उमर उन नबी के जैविक अवशेषों से जुड़ी सभी आवश्यक फोरेंसिक जांच पूरी की जा चुकी है। एजेंसी ने कहा कि मामले से संबंधित सभी जरूरी वैज्ञानिक साक्ष्य सुरक्षित कर लिए गए हैं और आगे की जांच के लिए इन अवशेषों को संरक्षित रखने की आवश्यकता नहीं रह गई है। एनआईए ने अदालत को यह भी बताया कि लंबे समय तक सुरक्षित रखने के कारण जैविक अवशेष समय के साथ खराब हो रहे हैं। ऐसे में उनका विधिसम्मत और सम्मानजनक तरीके से निस्तारण किया जाना आवश्यक है।

अदालत ने क्या कहा?

पटियाला हाउस स्थित NIA की विशेष अदालत ने रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। अदालत ने पीड़ितों और मुख्य आरोपी उमर उन नबी के जैविक अवशेषों का सम्मानजनक तरीके से अंतिम निस्तारण करने की अनुमति दी।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निस्तारण की पूरी प्रक्रिया मानव गरिमा बनाए रखते हुए संबंधित लोगों की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार पूरी की जाए। अदालत ने एनआईए को कार्रवाई पूरी होने के बाद अनुपालन (कॉम्प्लायंस) रिपोर्ट भी न्यायालय में दाखिल करने का निर्देश दिया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आदेश का पालन निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप किया गया है।

सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अदालत को बताया कि मामले से जुड़े सभी जैविक अवशेषों की आवश्यक फोरेंसिक जांच पूरी की जा चुकी है और उनसे जुड़े सभी जरूरी वैज्ञानिक साक्ष्य सुरक्षित कर लिए गए हैं। एजेंसी ने कहा कि जैविक अवशेषों से आवश्यक फोरेंसिक साक्ष्य पहले ही एकत्र किए जा चुके हैं, इसलिए जांच के लिए अब इनकी कोई आवश्यकता नहीं रह गई है। एनआईए के अनुसार, मामले की जांच और अभियोजन के लिए जरूरी सभी साक्ष्य सुरक्षित हैं और अवशेषों को आगे संरक्षित रखने की जरूरत नहीं है। एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि लंबे समय तक सुरक्षित रखने के कारण जैविक अवशेष खराब हो रहे हैं, इसलिए उनका सम्मानजनक और विधिसम्मत तरीके से अंतिम निस्तारण करने की अनुमति मांगी गई थी।

क्या है लाल किला ब्लास्ट मामला?

दिल्ली के चर्चित रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है। मामले में एजेंसी ने कई आरोपियों के खिलाफ विस्तृत जांच के बाद आरोपपत्र भी दाखिल किया है। 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के रेड फोर्ट इलाके में एक कार में हुए शक्तिशाली विस्फोट में 11 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे। घटना के बाद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई। जांच पूरी होने के बाद एनआईए ने मुख्य आरोपी उमर उन नबी समेत 10 आरोपियों के खिलाफ 7,500 पन्नों का आरोपपत्र (चार्जशीट) अदालत में दाखिल किया। एनआईए के अनुसार, आरोपियों के संबंध प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद से होने का आरोप है। मामले की सुनवाई फिलहाल अदालत में जारी है।

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