साढ़ौरा से कांग्रेस विधायक रेणु बाला के पति ऋषिपाल के भाजपा में शामिल होने के बाद से राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं कि क्या रेणु बाला भी पार्टी बदलेंगी। विधायक सदस्यता और दल-बदल कानून के कारण यह फैसला उनके लिए कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा की राजनीति में साढ़ौरा सीट अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई है। मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini द्वारा सोशल मीडिया पर वरिष्ठ नेता ऋषिपाल और उनके समर्थकों के भाजपा में शामिल होने का स्वागत किए जाने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है -क्या कांग्रेस विधायक रेणु बाला भी जल्द भाजपा का दामन थाम सकती हैं?
दरअसल, ऋषिपाल कोई सामान्य राजनीतिक चेहरा नहीं हैं। वे साढ़ौरा से कांग्रेस विधायक Renu Bala के पति हैं। खास बात यह भी है कि रेणु बाला उन पांच कांग्रेस विधायकों में शामिल हैं, जिन पर हालिया राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का आरोप लगा और बाद में कांग्रेस ने उन्हें निलंबित कर दिया। ऐसे में पति का भाजपा में जाना राजनीतिक संकेतों को और तेज कर रहा है।
भाजपा में तुरंत शामिल होने की क्या दिक्कत?
राजनीतिक रूप से रेणु बाला भाजपा में शामिल होना चाहें तो यह असंभव नहीं, लेकिन कानूनी और विधायी पेच जरूर हैं। अगर वे विधायक रहते हुए औपचारिक रूप से कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन करती हैं, तो उन पर दल-बदल कानून लागू हो सकता है। चूंकि वे कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित विधायक हैं, इसलिए पार्टी छोड़ने या दूसरी पार्टी का खुला समर्थन करने पर उनकी विधानसभा सदस्यता खतरे में पड़ सकती है।

सदस्यता जा सकती है या बच सकती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कोई विधायक अपनी मूल पार्टी की सदस्यता छोड़ता है या सार्वजनिक रूप से दूसरी पार्टी की गतिविधियों में शामिल होता है, तो विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उसकी सदस्यता खत्म करने की याचिका लग सकती है। हालांकि अंतिम फैसला स्पीकर के स्तर पर और कानूनी प्रक्रिया के बाद होता है। कई मामलों में फैसले में लंबा समय भी लग जाता है, इसलिए राजनीतिक गणित और समय-निर्धारण यहां अहम भूमिका निभाते हैं।
फिर रेणु बाला के सामने क्या विकल्प?
राजनीतिक तौर पर रेणु बाला के पास तीन रास्ते माने जा रहे हैं। पहला- वे फिलहाल प्रतीक्षा करें और विधायक पद बरकरार रखते हुए खुलकर कोई राजनीतिक फैसला न लें। दूसरा- यदि भाजपा में जाना तय हो तो पहले इस्तीफा देकर नई राजनीतिक पारी शुरू करें। तीसरा- निलंबन के बाद कांग्रेस से दूरी बनाए रखें लेकिन औपचारिक फैसला सही समय पर लें, खासकर जब विधानसभा चुनाव या कोई बड़ा राजनीतिक समीकरण सामने हो।
क्या पति की एंट्री ‘संकेत’ है?
राजनीतिक जानकार इसे महज पारिवारिक निर्णय मानने के बजाय “सॉफ्ट पॉलिटिकल ट्रांजिशन” के रूप में भी देख रहे हैं। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में ऋषिपाल का समर्थकों सहित भाजपा में शामिल होना और उसी दिन सीएम का सार्वजनिक स्वागत संदेश आना, सियासी हलकों में यह चर्चा तेज कर चुका है कि साढ़ौरा में आगे बड़ा राजनीतिक बदलाव दिख सकता है। हालांकि अभी तक रेणु बाला की तरफ से भाजपा में जाने को लेकर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है- क्या रेणु बाला तुरंत राजनीतिक जोखिम लेंगी, या समय का इंतजार कर “सही मौके” पर फैसला करेंगी? साढ़ौरा की राजनीति आने वाले दिनों में और दिलचस्प होती दिख रही है।

