अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन दौरे के बाद से बड़े संकट में हैं. उन्हें अपने ही देश में विरोध का सामना करना पड़ रहा है. ईरान को लेकर बढ़ते तनाव, 1.8 अरब डॉलर के विवादित फंड और ट्रंप के फैसलों पर अमेरिकी संसद में बड़ा राजनीतिक संघर्ष शुरू हो गया है. खास बात ये है कि ट्रंप के विपक्षी डेमोक्रेट्स सांसद ही इसका विरोध नहीं कर रहे, बल्कि उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के भी सांसद उनके खिलाफ खड़े दिखाई दे रहे हैं.

अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव पास हो गया है। वोटिंग में 4 रिपब्लिकन सांसदों ने भी विपक्षी पार्टी डेमोक्रेट्स का साथ दिया। हालांकि 3 रिपब्लिकन सांसद वोटिंग में शामिल नहीं हुए।

अमेरिकी संसद में ईरान युद्ध को खत्म किए जाने को लेकर प्रस्ताव पास किया गया है. सीनेटरों ने 7 बार असफल कोशिश के बाद आठवीं बार में 50-47 वोट से जीत हासिल की है. डेमोक्रेटिक सीनेटर टिम केन के इस प्रस्ताव में 4 रिपब्लिक सांसदों ने भी साथ दिया है. इसमें साफ कहा गया है कि अमेरिका ईरान के भीतर या उसके विरुद्ध  अमेरिकी सशस्त्र बलों को हटा ले, जब तक कि युद्ध की घोषणा या सैन्य बल के उपयोग की संसद से मंजूरी न ली जाए. दरअसल अमेरिकी संसद राष्ट्रपति के फैसलों को रोक या पलट सकती है. फंडिंग अटका सकती है और राष्ट्रपति के युद्ध अधिकारों भी सीमित कर सकती है.

अभी सीनेट में इस पर अंतिम वोटिंग होनी बाकी है। इसके बाद इसे रिपब्लिकन बहुमत वाली हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी लेनी होगी। हालांकि उसके बाद भी ट्रम्प इसके खिलाफ वीटो कर सकते हैं। फिर उस वीटो को रद्द करने के लिए सीनेट और हाउस दोनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए होगा, जो फिलहाल मुश्किल माना जा रहा है।

यह वोट विपक्ष के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है जो कह रहे थे कि अमेरिका में युद्ध शुरू करने या सेना भेजने का अधिकार राष्ट्रपति नहीं बल्कि संसद के पास होना चाहिए। अमेरिकी संविधान में भी यही व्यवस्था दी गई है।

इस प्रस्ताव को वर्जीनिया के डेमोक्रेट सीनेटर टिम केन लेकर आए हैं। बहस के दौरान उन्होंने कहा कि अभी जब युद्धविराम की बात हो रही है, तब ट्रम्प को संसद के सामने आकर अपनी रणनीति बतानी चाहिए। डेमोक्रेट सीनेटर टिम केन ने कहा कि युद्ध शुरू करने का अधिकार संसद के पास है, सिर्फ राष्ट्रपति के पास नहीं। वहीं व्हाइट हाउस का कहना है कि ट्रम्प ने अमेरिकी सुरक्षा के लिए अपने अधिकारों के तहत कार्रवाई की है।

अमेरिका ने 28 फरवरी को पहली बार ईरान पर हमले किए थे. तब से 80 दिन से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन कांग्रेस से इसकी अनुमति नहीं ली गई, जबकि 60 दिन में ही ऐसा करना था. ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि अप्रैल में सीजफायर होने की वजह से 60 दिन की घड़ी रुकी है, लेकिन सीनेटर टिम केन का कहना है कि- मुझे नहीं लगता कानून इस तर्क को मानता है.

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