Retired Captain land dispute Jaisalmer: देश की सुरक्षा के लिए 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में दुश्मन का सीना चीरने वाले रिटायर्ड कैप्टन चुन्नीलाल आज खुद संकट में हैं। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा निवासी कैप्टन चुन्नीलाल इस समय अपनी जमीन को बचाने की कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र में आवंटित उनकी कृषि भूमि पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जा करने का मामला सामने आया है।

जमीन की निगरानी बनी परेशानी की जड़

सरकार ने वर्ष 2002 में मोहनगढ़ क्षेत्र में कैप्टन चुन्नीलाल को 25 बीघा कृषि भूमि आवंटित की थी। उस समय क्षेत्र में पानी और मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी थी। इस कारण कैप्टन चुन्नीलाल वापस हिमाचल प्रदेश लौट गए। जमीन की देखरेख का जिम्मा उन्होंने अपने पड़ोसी किसान को सौंप दिया था।

लंबे समय तक जमीन खाली रहने के कारण उस पर अवैध कब्जा करने की साजिश रची गई। हाल ही में जब कैप्टन ने अपनी जमीन की स्थिति जानी, तो उनके होश उड़ गए। उन्हें पता चला कि उनकी जमीन का मालिकाना हक किसी और के नाम पर हो चुका है।

फर्जी पहचान और दस्तावेजों का खेल

कैप्टन के बेटे हनुमान सिंह की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, मोहनलाल, धन्नाराम, करणाराम और ओमप्रकाश ने मिलकर इस जालसाजी को अंजाम दिया। शिकायत में आरोप है कि 16 जून को किसी व्यक्ति को फर्जी कैप्टन चुन्नीलाल बनाकर उप-पंजीयक कार्यालय भेजा गया। वहां फर्जी फोटो, नकली हस्ताक्षर और फर्जी पहचान पत्र जमा कर रजिस्ट्री कराई गई। इसके बाद 22 जून को मोहनगढ़ उपनिवेशन तहसील में जमीन का म्यूटेशन भी दर्ज करवा लिया गया।

व्यवस्था पर उठे सवाल

कैप्टन चुन्नीलाल ने नम आंखों से कहा कि उन्होंने देश की रक्षा में अपने जीवन का बड़ा हिस्सा दिया है। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें अपनी ही जमीन के लिए सरकारी दफ्तरों और पुलिस के चक्कर लगाने पड़ेंगे। यदि रजिस्ट्री के समय दस्तावेजों का सही सत्यापन हुआ होता, तो यह धोखाधड़ी संभव नहीं थी। फिलहाल पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

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