दिल्ली में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड सरकारी अधिकारी को 1.62 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बना लिया। आरोपियों ने पहले व्हाट्सऐप के जरिए दोस्ती कर उनका भरोसा जीता और फिर क्रिप्टोकरेंसी में मोटे मुनाफे का झांसा देकर जीवनभर की जमा-पूंजी निवेश करा ली। मामला सामने आने के बाद पीड़ित की शिकायत पर दिल्ली पुलिस (Delhi Police) स्पेशल सेल ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, ठगों ने व्हाट्सऐप पर बातचीत के जरिए पीड़ित से करीबी संबंध बनाए और उन्हें एक कथित क्रिप्टो निवेश योजना में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में अच्छे रिटर्न का भरोसा दिलाकर उनका विश्वास जीता गया, जिसके बाद अलग-अलग चरणों में उनसे कुल 1.62 करोड़ रुपये निवेश करा लिए गए।
जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस लेने या निवेश से जुड़े सवाल पूछने शुरू किए तो आरोपियों ने संपर्क कम कर दिया। पुलिस के मुताबिक, राज खुलने और शिकायत दर्ज होने के डर से ठगों ने मुख्य महिला आरोपी की मौत का झूठा नाटक भी रचा, ताकि पीड़ित को गुमराह किया जा सके और मामला आगे न बढ़े। मामले का खुलासा होने पर पीड़ित ने दिल्ली पुलिस से शिकायत की। पुलिस अब बैंक लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान और उनके नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
पिछले साल अगस्त में केंद्र सरकार के एक सेवानिवृत्त अधिकारी के वॉट्सऐप पर ‘श्रेया शर्मा’ नाम की एक महिला का संदेश आया। उसने खुद को जालंधर की लेदर बैग कारोबारी बताया और बातचीत का सिलसिला शुरू किया। धीरे-धीरे दोनों के बीच रोजाना घंटों चैट होने लगी, जिससे अधिकारी का उस पर भरोसा बढ़ता गया। बातचीत के दौरान महिला ने क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग से भारी मुनाफा कमाने का दावा किया और अधिकारी को भी निवेश के लिए प्रेरित किया। उसके भरोसे में आकर अधिकारी ने शुरुआत में 34 लाख रुपये निवेश किए। विश्वास मजबूत करने के लिए ठगों ने अधिकारी को शुरुआती निवेश पर 3.30 लाख रुपये का मुनाफा निकालने (विदड्रॉ) भी दिया। इससे उन्हें लगा कि निवेश पूरी तरह सुरक्षित और लाभदायक है। इसके बाद अधिक मुनाफे के लालच में अधिकारी ने अपनी पूरी जमा-पूंजी भी निवेश कर दी।
फर्जी ‘अमीर मामा’ बनकर भी ठगे 58 लाख
जांच में सामने आया कि जब रिटायर्ड सरकारी अधिकारी ने अपने निवेश की रकम निकालने की कोशिश की, तो साइबर ठगों ने उनका कथित ट्रेडिंग अकाउंट ब्लॉक कर दिया। आरोपियों ने दावा किया कि अकाउंट को दोबारा सक्रिय कराने के लिए ‘मनी लॉन्ड्रिंग वेरिफिकेशन’ की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। पुलिस के अनुसार, खुद को ‘श्रेया’ बताने वाली महिला ने इसी बहाने पीड़ित से करीब 70 लाख रुपये और ट्रांसफर करवा लिए। इसके बावजूद जब रकम वापस नहीं मिली, तो ठगों ने एक और नया झांसा तैयार किया। आरोप है कि महिला ने पीड़ित की बातचीत कैलिफोर्निया में रहने वाले अपने कथित ‘अमीर मामा’ से कराई। इस व्यक्ति ने विभिन्न बहानों और दबाव के जरिए अधिकारी को भरोसे में लेकर उनसे 58 लाख रुपये और ट्रांसफर करवा लिए।
पैसे ऐंठने के बाद रची मौत की झूठी कहानी
पुलिस जांच के अनुसार, पीड़ित से करोड़ों रुपये की ठगी करने के बाद साइबर ठगों ने उन्हें गुमराह करने के लिए एक नई कहानी गढ़ी। आरोप है कि खुद को ‘श्रेया’ बताने वाली महिला ने अधिकारी को आखिरी संदेश भेजकर दावा किया कि वह पेट की गंभीर बीमारी से जूझ रही है और उसकी एंडोस्कोपी होनी है। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया। कुछ दिनों बाद एक व्यक्ति, जिसने खुद को महिला का ‘मामा’ बताया, ने पीड़ित से संपर्क कर कहा कि उसकी मां इलाज के लिए उसे अमेरिका ले गई हैं। इसके बाद गैंग के एक अन्य सदस्य ने महिला की मां बनकर भी अधिकारी से बातचीत की, ताकि कहानी को विश्वसनीय बनाया जा सके।
जांच के मुताबिक, अगले ही दिन आरोपियों ने पीड़ित को फोन कर दावा किया कि महिला की मौत हो गई है। पुलिस का कहना है कि यह कथित कहानी भी ठगी की सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकती है। इस खबर के बाद रिटायर्ड अधिकारी गहरे सदमे में आ गए। पीड़ित को जब पूरे घटनाक्रम पर संदेह हुआ, तब उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की। फिलहाल पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, बैंक लेनदेन और कॉल रिकॉर्ड के आधार पर पूरे साइबर ठगी नेटवर्क की जांच कर रही है।
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