कुंदन कुमार/पटना। बिहार में पुलिस एनकाउंटर का एक मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता एजाज अहमद ने भरत तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में मौत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने राज्य सरकार की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए इसे पुलिसिया दमन और मामले को दबाने की साजिश करार दिया है।
एनकाउंटर पर उठे गंभीर सवाल
राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने सीधे तौर पर पुलिस की कार्रवाई पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए पूछा है कि आखिर किन परिस्थितियों में भरत तिवारी की जान ली गई? उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने जिसे एनकाउंटर का नाम दिया है वह वास्तव में सुनियोजित हत्या हो सकती है। एजाज अहमद के अनुसार प्रशासन अब अपनी विफलता और संलिप्तता को छिपाने के लिए मृतक को मानसिक रूप से विक्षिप्त बताकर पूरे मामले का नैरेटिव बदलने की कोशिश कर रहा है।
पीड़ित परिवार और ग्रामीणों पर दबाव
मामला तब और गंभीर हो गया जब पुलिस ने न्याय की मांग करने वाले पीड़ित परिवार और गांव के लोगों के खिलाफ ही प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर दी। एजाज अहमद ने कहा कि जो लोग लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं उन्हें पुलिस द्वारा डराया और धमकाया जा रहा है। यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है कि रक्षक ही अब दमनकारी भूमिका में आ गए हैं।
राजद की सरकार से दो टूक मांग
राजद ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकार इस मामले में लीपापोती करने का प्रयास कर रही है। एजाज अहमद ने सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- निष्पक्ष जांच: पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सच सामने आ सके।
- दोषियों पर कार्रवाई: मुठभेड़ के नाम पर हुई इस घटना के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।
- दमन बंद हो: पीड़ित परिवार को प्रताड़ित करना बंद किया जाए और दर्ज की गई गलत प्राथमिकी को वापस लिया जाए।
- राजद ने चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला, तो पार्टी इस मुद्दे को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मामले पर क्या रुख अपनाती है और क्या वास्तव में दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है।

