Dharm Desk – पवित्र सावन मास का शुभारंभ हो चुका है। भगवान भोलेनाथ की भक्ति का यह महीना केवल धार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का समय नहीं है। बल्कि ग्रहों के दुष्प्रभावों और शनि देव की वक्र दृष्टि से मुक्ति पाने का सबसे सिद्ध असबर भी माना जाता है। महादेव स्वयं शनिदेव के गुरु है। ऐसे में सावन के पावन दिनों में शिव जी की शरण लेने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मिलने वाले कष्ट स्वतः ही दूर होने लगते है। वर्तमान समय में तीन प्रमुख राशियों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है। यदि आप भी इनमें से किसी राशि से संबंधित हैं।तो सावन का यह महीना आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

इन राशियों पर है शनि की साढ़ेसाती
मेष राशि
मेष राशि के जातकों पर वर्तमान में शनि की साढ़े साती का पहला चरण चल रहा है। इस चरण में व्यक्ति को मानसिक तनाव, कार्यों में विलंब और अनावश्यक खर्चों का सामना करना पड़ सकता है।
मीन राशि
मीन राशि पर साढ़ेसाती का दूसरा यानी मध्य चरण जारी है। ज्योतिष में इस चरण को सबसे अधिक प्रभावकारी और कष्टदायी माना गया है। इसमें स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन में उथल-पुथल देखने को मिल सकती है ।
कुंभ राशि
कुंभ राशि के जातकों पर साढ़ेसाती का अंतिम व तीसरा चरण चल रहा है । इस चणर में परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं, लेकिन करियर और निवेश के मामलों में साधावनी बर तनी बेहद जरूरी होती है।
सावन में शनि दोष निवारण के अचूक उपाय
यदि आप शनि के भारी प्रभाव से परेशान है, सावन के महीने में इन आसान और अचूक धार्मिक उपायों को अपनाकर राहत पा सकते हैं…
- शिवलिंग पर शमी पत्र व तिल चढ़ाएं-सावन में प्रतिदिन पानी में काले तिल मिलकर शिवलिंग का जलाभिषेक करें। इसके साथ ही बाबा को शमी पत्र अर्पित करें, क्योंकि शमी का संबंध शनिदेव से माना गया है ।
- छाया दान करें-शनिवार की सुबह सरसों के तेल में अपना चेहरा देखकर उस तेल को किसी निर्धन व्यक्ति या शनि मंदिर में दान कर दें। इसे छाया दान कहते हैं।
- पीपल के नीचे जलाएं दीपक- सावन के शनिवार को सूर्यास्त के बाद पीलप के वृक्ष के पास सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं और सात बार परिक्रमा करें।
- महामृत्युंजय मंत्र का जाप- सावन में रुद्राक्ष की माला से भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र या शनि मंत्र ओम शं शनैश्चराय नमः का जाप करें। इससे मानसिक शांति मिलती है।
- हनुमान जी की साधना-शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें और बजरंगबली को सिंदूर व चमेली का तेल अर्पित करें।
- सेवा और दान कर्म- शनि कर्मफल दाता हैं, इसलिए सावन में किसी असहाय, वृद्ध या मजदूर वर्ग के व्यक्ति का अमापन न करें। गरीबों को काले उड़द, जूते या वस्त्र का दान करें।


