कुंदन कुमार/पटना। बिहार की राजधानी स्थित जदयू प्रदेश कार्यालय में आयोजित स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के जनता दरबार में आज उस समय गहमागहमी बढ़ गई जब राजद विधायक बोगो सिंह वहां पहुंचे। अपनी व्यथा सुनाने पहुंचे बोगो सिंह ने सरकार की कार्यशैली और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
क्या है पूरा मामला?
विधायक बोगो सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2014-15 में पू्र्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सहमति से अपने गांव में एक छह बेड वाले अस्पताल के निर्माण के लिए अपनी 2 करोड़ रुपये की जमीन दान में दी थी। यह जमीन उन्होंने अपनी माता के नाम पर अस्पताल बनाने के लिए दी थी। विधायक के अनुसार उस समय अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था लेकिन चुनाव हार जाने के बाद यह परियोजना अधर में लटक गई।
अस्पताल बना भूसा घर
बोगो सिंह ने अत्यंत दुख के साथ बताया कि जिस उद्देश्य के लिए उन्होंने जमीन दी थी वह पूरा नहीं हो सका। आज स्थिति यह है कि वह प्रस्तावित अस्पताल भवन महज एक भूसा घर बनकर रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां अब मरीजों का इलाज होने के बजाय भूसा रखा जाता है और अस्पताल परिसर में आवारा कुत्ते बैठे रहते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात और आश्वासन
विधायक बोगो सिंह ने बताया कि वह पहले भी संबंधित विभाग में अधिकारियों से मिलने गए थे लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो पाई थी जिससे वे काफी निराश थे। आज स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के जनता दरबार में पहुंचकर उन्होंने अपनी समस्या रखी। मंत्री ने विधायक की बात सुनी और मामले को संज्ञान में लेते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
सुशासन पर तेजस्वी यादव के सुर में सुर
बोगो सिंह ने इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के रुख का समर्थन किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार बने हुए 6 महीने बीत चुके है लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही सुशासन की सरकार है जहां अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण जनसुविधाएं उपेक्षा का शिकार हैं। बोगो सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे राजनीति से ऊपर उठकर जनता के हक के लिए सवाल पूछने आए हैं और सरकार को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी।

