कुंदन कुमार/पटना। बिहार की राजनीति में मदरसा शिक्षकों के वेतन भुगतान का मामला एक बार फिर गरमा गया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधान पार्षद (MLC) कारी सोहेब ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली और सदन के भीतर मंत्रियों द्वारा दिए जाने वाले जवाबों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कारी सोहेब का कहना है कि एक तरफ जहां मदरसों में कार्यरत अन्य कर्मचारियों और स्टाफ को समय पर वेतन मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ पढ़ाने वाले शिक्षकों को इससे पूरी तरह वंचित रखा गया है। उन्होंने इसे सरासर अन्याय करार दिया है।
सदन में सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिलने का आरोप
कारी सोहेब ने पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को विधान परिषद के सत्र के दौरान उठाया था। उनका आरोप है कि जब उन्होंने सदन में मदरसा शिक्षकों के बकाए वेतन और भुगतान में हो रही देरी को लेकर सवाल पूछा, तो सरकार की ओर से कोई भी स्पष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते सदन में जनता और शिक्षकों की आवाज उठाना उनका कर्तव्य है, लेकिन सरकार और संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में पूरी तरह से लीपापोती करने की कोशिश कर रहे हैं।
अन्य स्टाफ को वेतन, शिक्षकों को क्यों नहीं? – न्याय व्यवस्था पर उठाए सवाल
आरजेडी एमएलसी ने सरकार से कड़ा सवाल पूछते हुए कहा कि यह किस प्रकार का न्याय है कि एक ही संस्थान में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ ऐसा भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। जब मदरसों के अन्य प्रशासनिक और गैर-शिक्षण स्टाफ को नियमित रूप से वेतन का भुगतान किया जा रहा है, तो आखिर शिक्षकों को इस अधिकार से क्यों वंचित रखा जा रहा है? उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज की रीढ़ होते हैं जो बच्चों का भविष्य गढ़ते हैं, लेकिन आज उन्हें अपने हक के वेतन के लिए भी सड़कों से लेकर सदन तक संघर्ष करना पड़ रहा है।
विपक्ष के सवालों से बच रही है सरकार: कारी सोहेब
सरकार पर हमला जारी रखते हुए कारी सोहेब ने कहा कि मौजूदा सरकार विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले जनहित के तीखे सवालों का सामना करने से कतरा रही है। सदन के अंदर विपक्ष को सही और तथ्यात्मक जवाब देने के बजाय सरकार के नुमाइंदे मामलों को टालने का काम करते हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया और कहा कि जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों से इस तरह मुंह मोड़ना और विपक्ष के सवालों के जवाब न देना पूरी तरह से गलत है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मदरसा शिक्षकों के वेतन का भुगतान जल्द से जल्द शुरू नहीं किया गया और इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो राजद इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर सदन तक जोरदार आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। शिक्षकों के अधिकारों की इस लड़ाई को पार्टी किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देगी और सरकार को इस तानाशाही रवैये के खिलाफ जवाब देना ही होगा।


