पटना। शहर के 10 सर्कुलर रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास और सुरक्षा व्यवस्था में कटौती को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। हाल ही में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार द्वारा सुरक्षा वापस लौटाने के निर्णय के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर
राजद सुप्रीमो लालू यादव ने सुरक्षा घटाने और आवास खाली करने के नोटिस को लेकर नीतीश कुमार पर सीधा निशाना साधा है। लालू ने कहा सब कुछ नीतीश कुमार करवा रहे हैं। वहीं सिंगापुर से वापसी के दौरान दिल्ली एयरपोर्ट पर भी उन्होंने इस कार्रवाई को बदले की भावना और घृणा से प्रेरित बताया। इसके अतिरिक्त, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सीधे तौर पर सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह सब जानबूझकर किया जा रहा है।
जदयू का कड़ा पलटवार
इस पूरे विवाद पर जदयू नेता और राज्य सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लालू यादव के बयानों को सिरे से खारिज करते हुए कहा लालू जी मानसिक रूप से परेशान हैं। जब तक नीतीश कुमार सत्ता में थे तब तक वे राबड़ी आवास में रहे लेकिन अब जब सरकार ने उन्हें रहने के लिए एक व्यवस्थित स्थान दिया है तो वे दबाव बना रहे हैं।
अशोक चौधरी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और आवास से जुड़े सभी निर्णय सुरक्षा समिति और पुलिस विभाग द्वारा लिए जाते हैं इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है। उन्होंने चेताया कि यदि सुरक्षा लौटाने के बाद कोई अप्रिय घटना घटती है, तो इसके जिम्मेदार वे स्वयं होंगे।
क्या कहना है बिहार पुलिस का?
विवाद के बीच बिहार पुलिस ने आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट की है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी एक बयान में पुलिस ने कहा कि दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को ‘विशेष सुरक्षा दल अधिनियम 2010’ के तहत पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई गई है। इसमें अंगरक्षक, आवास गार्ड, स्कॉट गार्ड, पायलट और बुलेट प्रूफ (BR) कार जैसी सुविधाएं शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, सुरक्षा में कोई कटौती नहीं की गई है बल्कि नियमों के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था जारी है।
वर्तमान में यह मुद्दा अब प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर एक राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है जहां आरोप और प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।

