पटना। ​राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने कवायद तेज कर दी है। पार्टी कार्यालय में इन दिनों अलग-अलग जिलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ मैराथन बैठकें चल रही हैं। इसी कड़ी में भोजपुर और नवादा समेत कई जिलों के कार्यकर्ताओं के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है। इन बैठकों में प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल भी सक्रिय रूप से मौजूद हैं।
​संगठन में नई जान फूंकने के लिए तेजस्वी यादव ने जिलाध्यक्ष पद के लिए कुछ कड़े और स्पष्ट मानदंड तय किए हैं। इसके तहत हर जिले से चार-चार संभावित नाम मांगे गए हैं, जिनमें से सबसे सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता को कमान सौंपी जाएगी।

​जिलाध्यक्ष पद के लिए तय की गई शर्तें

  • ​उम्र सीमा: राजद को युवाओं की पार्टी के रूप में ढालने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि जिलाध्यक्ष की उम्र 55 वर्ष से कम होनी चाहिए।
  • ​चुनावी प्रतिबंध: जो व्यक्ति पार्टी का जिलाध्यक्ष बनेगा, वह आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाएगा।
  • ​कार्यकाल की सीमा: जो नेता पहले से दो बार जिलाध्यक्ष रह चुके हैं, उन्हें इस पद पर दोबारा मौका नहीं मिलेगा। हालांकि, बेहतरीन कार्य करने वाले पदाधिकारियों को संगठन में प्रमोशन देकर बड़ी जिम्मेदारियां दी जाएंगी।

​पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव का कहना है कि वार्ड, पंचायत, प्रखंड से लेकर जिला और राज्य स्तर तक संगठन को लोहे का चना बनाने के लिए तेजस्वी जी लगातार प्रयासरत हैं। वहीं भोजपुर जिलाध्यक्ष बीरबल यादव का मानना है कि संगठन को जमीनी स्तर पर ताकतवर बनाने के लिए शीर्ष नेतृत्व का हर फैसला सर्वमान्य है।

​रोहिणी आचार्य की कड़ी नाराजगी

​एक तरफ जहां संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी और राजद नेत्री रोहिणी आचार्य ने इन फैसलों और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए शीर्ष नेतृत्व पर कड़ा प्रहार किया है।
​रोहिणी ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि वैचारिक निष्ठा और लंबे संघर्ष को दरकिनार करके ऐन चुनाव से पहले पार्टी में शामिल होने वाले अवसरवादी चेहरों को प्राथमिकता देना समर्पित कार्यकर्ताओं का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों तक संघर्ष की भट्टी में तपकर और लाठियां खाकर पार्टी को सींचने वाले जमीनी नेताओं की उपेक्षा की जा रही है, जो कि निष्ठावान लालूवादियों के साथ सीधा वादाखिलाफी है। उनके अनुसार यह रवैया राजद के आंतरिक लोकतंत्र और मूल सिद्धांतों पर गहरा आघात है।