कुंदन कुमार, पटना। शहर के जगजीवन राम शोध एवं अध्ययन संस्थान में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ओर से एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समाजवादी आंदोलन के पुरोधा और समर्पित नेता तुलसीदास मेहता की स्मृति में आयोजित हुआ। सभा में राजद के कई दिग्गज नेता और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके राजनीतिक व सामाजिक योगदान को विस्तार से याद किया।

​वक्ताओं ने साझा किए विचार और संघर्ष के संस्मरण

​कार्यक्रम की शुरुआत तुलसीदास मेहता को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसके बाद मंच पर मौजूद वक्ताओं ने उनके पूरे जीवन वृत्त और राजनीतिक सफर पर विस्तृत प्रकाश डाला। मुख्य वक्ताओं में पार्टी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी, जयप्रकाश नारायण यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री कांति सिंह प्रमुख रूप से शामिल थीं।
​अब्दुल बारी सिद्दीकी ने अपने संबोधन में कहा कि तुलसीदास मेहता ने अपना पूरा जीवन समाज के शोषित, पीड़ित और वंचित तबके की आवाज उठाने में समर्पित कर दिया था। उन्होंने सत्ता की राजनीति से ऊपर उठकर हमेशा आम जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ी। वहीं, जयप्रकाश नारायण यादव ने उनके साथ बिताए पलों को याद करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने कभी अपने आदर्शों से समझौता नहीं किया। कांति सिंह ने भी उनके विचारों को प्रासंगिक बताते हुए कहा कि आज के समय में उनके जैसे नेताओं के रास्ते पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

​वंचित वर्गों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका

​सभा में उपस्थित तमाम नेताओं ने एक स्वर में इस बात पर जोर दिया कि तुलसीदास मेहता ने अपने सार्वजनिक जीवन के दौरान समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक काम किया। उन्होंने समाज में व्याप्त असमानता और अन्याय के खिलाफ हमेशा मुखर होकर आवाज उठाई। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि उनका पूरा जीवन सामाजिक न्याय, समानता और भाईचारे की मिसाल रहा है। उनके राजनीतिक संघर्ष की बदौलत ही आज वंचित वर्गों को समाज में एक नई पहचान और राजनीतिक भागीदारी मिल पाई है।

​कार्यकर्ताओं ने लिया संकल्प

​कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी राजद कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने आह्वान किया कि मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में तुलसीदास मेहता जैसे समाजसेवियों के संघर्ष और उनकी विचारधारा को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद आवश्यक है, ताकि सामाजिक न्याय की लड़ाई को और अधिक मजबूती प्रदान की जा सके। इस आयोजन से न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा, बल्कि इसने यह भी संदेश दिया कि राजद अपने पुराने विचारकों और नायकों के योगदान को कभी नहीं भूलती है।