Bihar News: दिल्ली से आई एक आरटीआई (RTI) रिपोर्ट के बाद राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया है। दरअसल टीएमसी नेता और सांसद साकेत गोखले ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत कुछ जानकारी मांगी थी, जिसके मुताबिक पिछले 6 साल के दौरान केंद्र सरकार ने विभिन्न प्रचार माध्यमों पर कुल 25,86,00,00,000 रुपए (लगभग 2,586 करोड़ रुपए) खर्च किए हैं। टीएमसी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने सिर्फ पीएम मोदी के व्यक्तिगत प्रचार और विज्ञापनों के लिए इतना सारा पैसा पानी की तरह बहाया है। अब इस मामले पर सियासत भी तेज होती दिख रही है।
प्रधानमंत्री हैं या प्रचार-मंत्री?
लालू यादव की बेटी ने रोहिणी आचार्य ने भी इस मुद्दे पर पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने एक्स पोस्ट के जरिए कहा कि, प्रधानमंत्री हैं या प्रचार-मंत्री?
रोहिणी आचार्य ने कहा कि, आरटीआई के माध्यम से ये सामने आया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रचार-प्रसार पर 2586 करोड़ रुपए खर्च किए गए। ऐसे समय में जब देश बदहाल अर्थव्यवस्था, बेरोज़गारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब जनता के पैसे का इतना बड़ा हिस्सा प्रधानमंत्री के प्रचार पर खर्च किया जाना कई सवाल खड़े करता है।
‘विज्ञापन के दम पर झूठी छवि का निर्माण’
उन्होंने कहा कि, लोकतंत्र में सरकार का काम उपलब्धियों के आधार पर जनता का विश्वास जीतना है, ना कि भारी-भरकम विज्ञापन अभियानों के माध्यम से अपनी झूठी छवि निर्माण, अपना चेहरा चमकने पर अरबों रूपए खर्च करना। सरकारी कोष का यह धन अगर जनकल्याणकारी योजनाओं, विद्यालयों, अस्पतालों और बुनियादी सुविधाओं पर लगाया जाता तो आम नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलता।
‘प्रचार नहीं ले सकता विकास का स्थान’
रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा कि, जब देश की करोड़ों जनता महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रही हो, तब सरकारी प्रचार पर 2586 करोड़ रूपए खर्च करना जनहित की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। लोकतंत्र में जवाबदेही और विकास का स्थान प्रचार नहीं ले सकता।
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