अविनाश श्रीवास्तव, सासाराम। बिहार के रोहतास जिले में भारी बारिश और सोन नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पहाड़ी इलाकों से लेकर मैदानी भागों तक पानी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां नौहट्टा प्रखंड की कैमूर पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध महादेव खोह जलप्रपात उफान पर है, वहीं दूसरी तरफ रोहतास और तिलौथू प्रखंडों में सोन नदी के बाढ़ के पानी ने कई गांवों को अपने आगोश में ले लिया है।
महादेव खोह जलप्रपात का खतरनाक रूप
नौहट्टा प्रखंड के अंतर्गत कैमूर पहाड़ी पर स्थित महादेव खोह जलप्रपात में मूसलाधार बारिश के बाद भयंकर उफान आ गया है। इस जलप्रपात के बीच भगवान शंकर का एक प्राचीन मंदिर स्थित है, जिसके ठीक ऊपर झरने का पानी भारी तेज बहाव के साथ गिर रहा है। पानी की रफ्तार इतनी तेज और डरावनी है कि इसे देखकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। इस भयंकर स्थिति के बावजूद कुछ लापरवाह युवक जान जोखिम में डालकर झरने के आसपास नजर आ रहे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर लोगों को कैमूर पहाड़ी के झरनों और जलप्रपातों के पास जाने से सख्त मना किया है। अचानक पानी बढ़ने से किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका जताई गई है, इसलिए फिलहाल वहां स्नान करने या जाने से बचने की सलाह दी गई है।

सोन नदी के उफान से रोहतास और तिलौथू में बाढ़
मैदानी इलाकों में सोन नदी का जलस्तर बढ़ने से रोहतास तथा तिलौथू प्रखंड क्षेत्र के तटवर्ती गांवों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। रोहतास प्रखंड का तीउरा गांव पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है। सोन नदी के बीच उभरे ऊंचे टीलों और स्थानों पर फंसे लोगों को निकालने के लिए राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है।
जुगाड़ की नाव और विवशता की तस्वीरें
तिलौथू प्रखंड के सरैया गांव समेत फारुकगंज, शिवाला और मदारीपुर जैसे इलाके बाढ़ की मार से बुरी तरह प्रभावित हैं। इन गांवों के 50 से अधिक घर पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। अचानक आए इस सैलाब के कारण ग्रामीणों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। आवागमन के सारे साधन ठप होने के बाद तिलौथू के सरैया में ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए थर्मोकोल, लकड़ी और अन्य सामग्रियों को जोड़कर देसी जुगाड़ नाव तैयार की है। इसी अस्थायी नाव के सहारे ग्रामीण अपनी बकरियों, जरूरी सामान, बाइकों और छोटे बच्चों को बैठाकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बाढ़ जैसी स्थिति आती है, लेकिन इस बार पानी इतनी तेजी से और अचानक बढ़ा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई। प्रशासन और राहत टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार नजर बनाए हुए हैं और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया जा रहा है।



