अविनाश श्रीवास्तव, रोहतास। जिले के जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की धमक, गोलियों की गूंज और भय का काला साया हुआ करता था, आज वहां ज्ञान, विज्ञान, नवाचार और आधुनिक शिक्षा की इबादत लिखी जा रही है। हम बात कर रहे हैं रोहतास जिले के कभी नक्सल प्रभावित रहे तिलौथू स्थित उच्चतर माध्यमिक प्लस टू विद्यालय की, जिसकी कायापलट किसी चमत्कार से कम नहीं है। इस विद्यालय की आधुनिक तस्वीर देखकर कोई भी चौंक सकता है, क्योंकि यह आज देश के बड़े-बड़े निजी विद्यालयों को भी कड़ी टक्कर दे रहा है।

​आधुनिक सुविधाओं से लैस परिसर और आकर्षक परिवेश

​विद्यालय परिसर में कदम रखते ही एक हरा-भरा, लोक-आकर्षक उद्यान और प्राचीन धरोहर को संजोए हुए एक सुंदर व भव्य भवन आपका स्वागत करता है। इस विद्यालय की स्थिति देखकर किसी को भी यह भ्रम हो सकता है कि वह किसी महानगर के किसी प्रतिष्ठित प्राइवेट स्कूल में आ गया है। यहां छात्रों के चहुंमुखी विकास के लिए उच्च कोटि की व्यवस्थाएं की गई हैं।

  • ​अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं: विद्यालय में उन्नत विज्ञान प्रयोगशालाओं के साथ-साथ एक विशेष स्पेस लैब भी स्थापित की गई है। खास बात यह है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा यहां समय-समय पर विशेष कैंप भी लगाए जाते हैं, जिससे यहां के ग्रामीण परिवेश के बच्चे भी स्पेस साइंस जैसे आधुनिक विषयों पर खुलकर बात करते हैं।
  • ​डिजिटल और स्मार्ट शिक्षा: पढ़ाई को रोचक और प्रभावी बनाने के लिए विद्यालय में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल बोर्ड और पूरी तरह सुसज्जित कंप्यूटर लैब की सुविधा उपलब्ध है।
  • ​बुनियादी सुविधाएं: विद्यार्थियों के लिए विशाल खेल का मैदान, शारीरिक फिटनेस हेतु ओपन जिम, शुद्ध पेयजल और बेहतर शौचालय जैसी तमाम आधुनिक सुविधाएं कैंपस को खास बनाती हैं। इसके अलावा यहां वातानुकूलित कक्ष भी बनाए गए हैं।

​1932 की स्थापना और मॉडल स्कूल का सफर

​सन 1932 में स्थापित यह ऐतिहासिक विद्यालय आज बिहार में बदलती शिक्षा के नए स्वरूप की एक मजबूत पहचान बन चुका है। विद्यालय की शिक्षिका नूतन पांडे बताती हैं कि यहां कुल 32 शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं और यह शिक्षण संस्थान आज एक ‘मॉडल स्कूल’ की श्रेणी में शुमार हो चुका है।
​इस विद्यालय के छात्र केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे खेल, योगा, विज्ञान, डिजिटल शिक्षा, पुस्तक अध्ययन, व्यक्तित्व विकास और तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़ी नियमित शिक्षण प्रक्रियाओं में पूरी तन्मयता से हिस्सा लेते हैं। कभी गोलियों की आवाज सुनने वाले इस भूभाग के बच्चे आज अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक की बुलंदियों पर चर्चा कर रहे हैं।

​सामूहिक प्रयासों का सुखद परिणाम

​इस अभूतपूर्व बदलाव के पीछे किसी एक व्यक्ति का योगदान नहीं है। यह सब यहां के समर्पित शिक्षकों की अटूट लगन, विद्यार्थियों की गहरी एकाग्रता और स्थानीय नागरिकों के मिले-जुले सकारात्मक सहयोग के कारण ही संभव हो पाया है। रोहतास के तिलौथू का यह उच्चतर माध्यमिक प्लस टू विद्यालय आज पूरे समाज के लिए प्रेरणा का एक ऐसा स्रोत बन चुका है, जो यह साबित करता है कि सकारात्मक इच्छाशक्ति से कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है।