रेणु अग्रवाल, धार। साध्वी ऋतंभरा गुरुवार को धार स्थित भोजशाला मंदिर पहुंची। उन्होंने मंदिर में स्थापित मां वाग्देवी के चित्र के दर्शन कर पूजा की। इस दौरान भोजशाला परिसर वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। साध्वी ऋतंभरा के भोजशाला पहुंचने की सूचना मिलते ही भारी संख्या में लोग पहुंचे और उनका स्वागत किया।
साध्वी ऋतंभरा ने भोजशाला पहुंचकर श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भोजशाला का सत्य अग्नि परीक्षाओं से गुजर चुका है। उस सत्य को उसके पक्ष को समझते हुए भोजशाला हिंदू समाज को सौंपी गयी है। साधारण सी बुद्धि की बात है कि तथा कथित मौलाना पहले हुए थे या राजा भोज पहले हुए थे। हम दोबारा राजा भोज के समय का वैभव यहां देखेंगे। मां अधीर हो कर कह रही हैं कि मुझे लंदन से चलकर धार आना ही होगा। क्योंकि मैं भारत को भारत बनाए रखना चाहती हूं इसलिए भगवती जल्द आएंगी।

वहीं दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए Gen Z आंदोलन में लड़कियों के गाली देने पर भी साध्वी ऋतंभरा ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि संसार में जब देश की होली जलेगी तब हमें प्रह्लाद होना ही पड़ेगा। जैसे आग में जलाए गए पर जला नहीं पाए। धार नगरी ने पीड़ा जनक इतिहास भी देखा। यही वो धरा है जिसने विद्वानों को और बहुत सारे काव्य के नायकों को तैयार कर भारत को दिया और यही वो भूमि है जिसने जौहर जैसी सामूहिक अत्याचार नरसंहार जैसे दर्द को भी जिया।
लेकिन समय का प्रभाव, विधर्मियों की बेशर्मी जो भी कहिए अनाधिकारी हत्याओं के सिलसिले जारी रहे। लेकिन सबसे बड़ी प्रसन्नता की बात यह है कि जब दीप जलाए जाते हैं तो आंधियां जितनी चलती है उतनी बार दीप जलाए जाते हैं ये हिन्दू समाज ने सिद्ध किया और इस पक्ष में भोजशाला का सत्य देखकर हमारे पक्ष में निर्णय आया है।
उन्होंने आगे कहा कि हम दोबारा राजा भोज के समय का वैभव यहां देखेंगे। वैभव बिल्डिंगों से नहीं होता है। बिल्डिंगें भी वैभव को व्यक्त करने का एक मार्ग होती है। लेकिन इस धरती ने ज्ञान और विज्ञान से, काव्य से संगीत से और कला से पूरे भारत को श्रृंगारित किया था। मैं भी सपना देखती हूँ के भारतीयों की जो संताने है वो तुलसी के पौधे हैं जिनको वासनाओं की शराबों से नहीं संस्कारों के गंगाजल से सींचा जाना चाहिए और धार की ये भोजशाला पूरे भारत का नेतृत्व करेगी ऐसा हमें दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि मां भगवती आना चाहती है क्योंकि सबसे बड़ी बात है हमारी युवा पीढ़ी जब हमारा अंतः करण इतना दूषित होकर अपशब्द और अपसंस्कृति का हम मरण कर रहे हैं तो मां अधीर हो कर कह रही हैं क मुझे लंदन से चलकर धार आना ही होगा। क्योंकि मैं भारत को भारत बनाए रखना चाहती हूं इसलिए भगवती जल्दी आएंगी।
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