विकास कुमार/सहरसा। जिले के डेहरार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नोला पंचायत के भेलाही वार्ड नंबर 8 में लापरवाही की एक बड़ी कीमत दो मासूम बच्चियों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है। क्षेत्र में चल रहे एक अधूरे पुल निर्माण के दौरान छोड़े गए खतरनाक और गहरे गड्ढे में डूबने से दो सगी बहनों की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

​स्कूल से घर लौटने के दौरान हुआ हादसा

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक बच्चियों की पहचान गोविंदपुर गांव के रहने वाले नंदन यादव की दो बेटियों 4 वर्षीया निभा कुमारी और 7 वर्षीया निक्की कुमारी के रूप में हुई है। रोजाना की तरह दोनों बहनें पढ़ने के लिए स्कूल गई थीं।
​छुट्टी होने के बाद जब वे स्कूल से अपने घर वापस लौट रही थीं, तो रास्ते में उन्हें अधूरा पुल और उसके पास निर्माण कार्य के कारण बना हुआ एक बड़ा गड्ढा मिला। आशंका जताई जा रही है कि रास्ते की स्थिति और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण दोनों बच्चियों का पैर फिसल गया या वे अंदाज़ा न लगा पाने के कारण उस गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरीं। गड्ढा गहरा होने और समय पर सहायता न मिलने की वजह से दोनों मासूमों की पानी में डूबकर दर्दनाक मौत हो गई।

​परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल और पुलिस की कार्रवाई

​घटना की जानकारी मिलते ही मृतक बच्चियों के परिवार में कोहराम मच गया। माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस वीभत्स हादसे ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।
​घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आई। डेहरार थाना की पुलिस बल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर दोनों बच्चियों के शवों को पानी से बाहर निकाला और अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद पुलिस ने कागजी प्रक्रिया पूरी करते हुए दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, सहरसा भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और हर पहलू से जांच की जा रही है।

​ग्रामीणों में आक्रोश, ठेकेदार पर लापरवाही का गंभीर आरोप

​इस अप्रत्याशित और दुखद घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन और निर्माण एजेंसी के खिलाफ भारी गुस्सा फूट पड़ा है। ग्रामीणों ने खुलकर पुल निर्माण कार्य में बरती जा रही गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।
​ग्रामीणों का सीधे तौर पर कहना है कि यह हादसा कुप्रबंधन और प्रशासनिक अनदेखी का परिणाम है। उन्होंने निर्माण कार्य संभाल रहे ठेकेदार कमलेश यादव के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि संबंधित ठेकेदार या विभाग द्वारा समय रहते इस पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाता, या फिर निर्माण स्थल पर बने गड्ढे के चारों ओर सुरक्षा के पर्याप्त उपाय (जैसे बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड) किए जाते, तो आज इन दो मासूम बच्चियों की अकाल मौत नहीं होती और उनकीमती जानें बच जातीं।