सहरसा। जिले में तैनात जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) अजीत अमर इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों को लेकर सुर्खियों में हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीमों ने भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति (DA) के मामले में अजीत अमर के विभिन्न ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। महज साढ़े चार साल की छोटी सी नौकरी के दौरान उन्होंने अपनी वैध सैलरी से कई गुना अधिक यानी करीब 5 करोड़ रुपए की अकूत चल और अचल संपत्ति बना ली। इस पूरी कार्रवाई ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
चार ठिकानों पर एक साथ आठ घंटे तक चली छापेमारी
आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज होने के बाद ईओयू की चार विशेष टीमों ने शुक्रवार को एक साथ सीवान, सहरसा और छपरा में स्थित उनके कुल चार ठिकानों पर रेड डाली। मूल रूप से सीवान जिले के दरौंदा थाना अंतर्गत रैनी गांव के रहने वाले अजीत अमर के सरकारी आवास, कार्यालय और पुश्तैनी मकान को ईओयू की टीमों ने खंगाला। लगभग आठ घंटे तक चली इस लंबी तलाशी के दौरान जांच अधिकारियों को कई चौंकाने वाले दस्तावेज और बेहिसाब संपत्ति के सबूत हाथ लगे हैं।
पत्नी के नाम पर खरीदी गई थी बेनामी संपत्तियां और महंगे गहने
जांच में यह बात सामने आई है कि डीपीओ अजीत अमर अपनी अवैध कमाई की काली रकम को सीधे अपनी पत्नी पूजा कुमारी के बैंक खातों में ट्रांसफर करवाते थे और उन्हीं के नाम पर संपत्तियां खरीदते थे। छापेमारी के दौरान उनकी पत्नी पूजा कुमारी के नाम से सारण जिले के एकमा थाना क्षेत्र अंतर्गत परसागढ़ गांव में लगभग 6 बीघा 9 कट्ठा और 8 धूर जमीन के बहुमूल्य कागजात बरामद किए गए, जिसकी कुल कीमत करीब 41.50 लाख रुपए आंकी गई है। इसके अलावा, तलाशी के दौरान घर से करीब 40.5 लाख रुपए मूल्य के भारी मात्रा में सोने-चांदी के गहने भी जप्त किए गए हैं।
छपरा प्रतिनियुक्ति के दौरान भ्रष्टाचार के लगे थे गंभीर आरोप
दस्तावेजों और प्रशासनिक जांच के मुताबिक, सहरसा में मूल पदस्थापन के बाद अजीत अमर को सारण जिले में डीपीओ (प्लानिंग एंड अकाउंट) के पद पर प्रतिनियुक्त किया गया था। आरोप है कि सारण में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपने पद और अधिकारों का भारी दुरुपयोग किया। बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने की शिकायतें मिलने के बाद जब स्थानीय जिला प्रशासन ने उनके कामकाज की आंतरिक जांच की, तो मामला पूरी तरह संदिग्ध पाया गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उनकी प्रतिनियुक्ति को रद्द कर दिया और उन्हें वापस सहरसा भेज दिया गया था।
साल 2023 से 2025 के बीच खड़ी की गई करोड़ों की संपत्ति
ईओयू के पास मौजूद संपत्ति के दस्तावेजों के अनुसार, अजीत अमर द्वारा बनाई गई अधिकांश बेनामी और अवैध संपत्तियां साल 2023 से 2025 के बीच यानी महज दो वर्षों के भीतर अर्जित की गईं। जांच में यह खुलासा हुआ है कि डीपीओ साहब शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के बकाए वेतन के भुगतान की एवज में भारी-भरकम रिश्वत वसूला करते थे। शिक्षकों के एरियर भुगतान, सर्विस बुक को अपडेट करने, वेतनमान में संशोधन कराने तथा लंबे समय से रुके हुए वेतन को जारी करवाने के नाम पर खुलेआम अवैध वसूली की जाती थी। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों के मनचाहे तबादले और पोस्टिंग (ट्रांसफर-पोस्टिंग) तथा सरकारी स्कूलों में भवन निर्माण के विभिन्न कार्यों में भी टेंडर और एस्टीमेट पास करने के एवज में मोटी रकम ऐंठी जाती थी।
नौकरी के शुरुआती वर्षों में वेतन और संपत्ति का बड़ा अंतर
विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, पिछले साढ़े चार वर्षों के अपने पूरे सेवाकाल में अजीत अमर को वेतन के रूप में कुल मिलाकर लगभग 38 लाख रुपए ही मिले थे। इतनी सीमित सैलरी होने के बावजूद इतनी कम अवधि में 5 करोड़ रुपए की विशाल संपत्ति खड़ी कर लेना उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से पूरी तरह परे है। फिलहाल, आर्थिक अपराध इकाई इस पूरे मामले की अत्यंत गहराई से तफ्तीश कर रही है और उनके अन्य बैंक खातों तथा बेनामी संपत्तियों की भी लगातार खंगालबीन जारी है ताकि इस भ्रष्टाचार के नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।


