विकास कुमार, सहरसा। नगर निगम क्षेत्र में जिला प्रशासन द्वारा चलाई जा रही लगातार अतिक्रमण विरोधी अभियानों और बुलडोजर कार्रवाई ने गरीब स्ट्रीट वेंडरों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। दुकानों के टूटने और सामान के बर्बाद होने से इन दुकानदारों के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
भुखमरी की कगार पर वेंडर
स्ट्रीट वेंडर संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार, सचिव सीएम झा और मुख्य कार्यकारी दीपक कुमार सिंह ने बताया कि प्रशासन की इस बार-बार की कार्रवाई से बैंक ऋण लेकर व्यवसाय कर रहे छोटे दुकानदारों की कमर टूट गई है। स्थिति यह है कि वेंडरों के परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं। स्थानीय राजनीति के कारण इन्हें स्थाई दुकानें आवंटित नहीं की जा रही हैं, जिससे इनका जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
भेदभावपूर्ण कार्रवाई और अतिक्रमण का चक्र
नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा पुरानी दुकानों को हटाने के ठीक दूसरे दिन अन्य लोगों द्वारा उसी जमीन पर दोबारा झोपड़ियां खड़ी कर ली जाती हैं। परिणामस्वरूप, पुराने और वैध वेंडर बेदखल होकर सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं, जबकि ठेले और अवैध कब्जों के कारण शहर में यातायात और जाम की गंभीर समस्या भी पैदा हो रही है।
स्थाई समाधान की पुरजोर मांग
नगर निगम प्रशासन से वेंडरों ने अपील की है कि बार-बार होने वाली बैठकों और कोरी घोषणाओं से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर ठोस पहल की जाए। सभी प्रभावित दुकानदारों को चिन्हित कर तुरंत स्थाई दुकानें आवंटित की जाएं और शहर में व्यवस्थित वेंडिंग जोन का निर्माण किया जाए, ताकि गरीबों का रोजगार सुरक्षित हो सके और यातायात व्यवस्था भी सुचारू बनी रहे।



