दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास स्थित सैदुलाजाब इलाके में 30 मई को चार मंजिला निर्माणाधीन इमारत गिरने के मामले में मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम (MCD) को अवैध निर्माण को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। जांच में माना गया है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण ही यह दर्दनाक हादसा हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्माणाधीन इमारत में नियमों के उल्लंघन की जानकारी होने के बावजूद निगम की ओर से न तो निर्माण कार्य रुकवाया गया और न ही आवश्यक कानूनी कदम उठाए गए। यदि समय रहते कार्रवाई की जाती, तो हादसे को टाला जा सकता था।

मजिस्ट्रेट जांच में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के बाद मामले की वास्तविक स्थिति छिपाने और जांच को प्रभावित करने के लिए रिकॉर्ड में कथित तौर पर हेरफेर की गई। जांच अधिकारियों ने पाया कि कुछ दस्तावेजों और अभिलेखों में बदलाव कर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की गई। दक्षिण जिले के जिलाधिकारी (डीएम) लक्ष्य सिंघल ने करीब डेढ़ माह तक जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट में MCD की गंभीर लापरवाही और कथित रिकॉर्ड हेरफेर जैसे अहम मुद्दों को उजागर किया गया है। गौरतलब है कि इस दर्दनाक हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 10 अन्य घायल हुए थे। इमारत गिरने के बाद मलबा हटाने और राहत-बचाव कार्य में कई दिन लग गए थे। हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे।

शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

दिल्ली सरकार के सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि MCD को निर्माण में हो रहे नियमों के उल्लंघन की जानकारी थी। संबंधित अधिकारियों को कई बार शिकायतें भी मिली थीं, लेकिन इसके बावजूद अवैध निर्माण को रोकने या उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए।

समय रहते कार्रवाई होती तो टल सकता था हादसा

जांच में पाया गया कि MCD को अवैध निर्माण की जानकारी थी और इस संबंध में कई शिकायतें भी प्राप्त हुई थीं। इसके बावजूद नियमों को लागू कराने में गंभीर लापरवाही बरती गई। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि हादसे के बाद कुछ रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई। गौरतलब है कि 30 मई को साकेत मेट्रो स्टेशन के निकट स्थित एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई थी। इमारत में कोचिंग संस्थान, कैफे और कार्यालय संचालित हो रहे थे। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि आठ अन्य घायल हुए थे। घटना के बाद राहत और बचाव कार्य कई दिनों तक चला था।

मजिस्ट्रेट जांच में सामने आया कि इमारत में कथित तौर पर अवैध रूप से तीसरी और चौथी मंजिल का निर्माण किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, यह अनधिकृत संरचनात्मक विस्तार भवन की क्षमता और स्वीकृत मानकों के विपरीत था, जिससे पूरी इमारत की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हुई। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निर्माण संबंधी नियमों के पालन और उनकी निगरानी में गंभीर लापरवाही बरती गई। MCD को अवैध निर्माण की जानकारी होने और शिकायतें मिलने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि संबंधित अधिकारी समय रहते हस्तक्षेप करते, तो हादसे को रोका जा सकता था।

पुलिस और जल बोर्ड को क्लीन चिट

रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अवैध निर्माण और निगरानी में हुई चूक इस हादसे की प्रमुख वजहों में शामिल रही। जांच रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली जल बोर्ड (DJB) और अन्य संबंधित एजेंसियों की भूमिका की भी समीक्षा की गई, लेकिन उनके स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं पाई गई। इसी आधार पर इन एजेंसियों को मामले में क्लीन चिट दी गई है। वहीं, रिपोर्ट में एमसीडी की निगरानी व्यवस्था और भवन निर्माण नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने वाली प्रक्रिया में गंभीर खामियां चिन्हित की गई हैं। जांच में पाया गया कि अवैध निर्माण को लेकर पहले भी शिकायतें प्राप्त हुई थीं, लेकिन उन पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, यही एमसीडी की सबसे बड़ी चूकों में से एक रही।

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