महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार (5 जुलाई) को उस समय हलचल मच गई, जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दावा किया कि कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) धीरज लिंगाडे को दल बदलने के लिए 20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि, राउत ने यह नहीं बताया कि यह कथित पेशकश किसने की और लिंगाडे को किस राजनीतिक दल में शामिल करने की कोशिश की गई थी।

पत्रकारों से बातचीत में राउत ने कहा, “आप पार्टी कार्यकर्ताओं, सांसदों और विधायकों को तोड़ रहे हैं। धीरज लिंगाडे को 20 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी। यह मेरी जानकारी में है।” उन्होंने आगे कहा कि जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है और नेताओं को यह समझना चाहिए कि उन्हें कहां रुकना है, वरना इसका अंत अच्छा नहीं होता।

धीरज लिंगाडे ने आरोपों को बताया निराधार

संजय राउत के आरोपों के तुरंत बाद कांग्रेस एमएलसी धीरज लिंगाडे ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी भी तरह का ऐसा प्रस्ताव नहीं मिला और वह खुद राउत के इस बयान से हैरान हैं। लिंगाडे ने स्पष्ट किया कि इस तरह की कोई घटना उनके साथ नहीं हुई।

बीजेपी का पलटवार, गिरीश महाजन ने साधा निशाना

राउत के आरोपों पर बीजेपी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता गिरीश महाजन ने कहा कि संजय राउत अक्सर काल्पनिक आंकड़ों और बेबुनियाद दावों के जरिए सुर्खियां बटोरने की कोशिश करते हैं।

महाजन ने तंज कसते हुए कहा कि शिवसेना (यूबीटी) को इस तरह के आरोप लगाने के बजाय अपने संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने राउत के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।

राजनीतिक बयानबाजी से गरमाया माहौल

राउत के इस दावे और उसके बाद कांग्रेस एमएलसी व बीजेपी की प्रतिक्रियाओं ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, अब तक राउत अपने आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत या विस्तृत जानकारी पेश नहीं कर पाए हैं, जिससे यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित नजर आ रहा है।

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