अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। शिक्षा विभाग द्वारा काराकाट प्रखंड के 13 शिक्षकों की डिग्रियों को अमान्य घोषित किए जाने के बाद से हड़कंप मचा हुआ है। इस फरमान से प्रभावित शिक्षक इसे विभाग की मनमानी करार देते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। इसी कड़ी में मध्य विद्यालय चिकसिल के दिव्यांग शिक्षक उदय शंकर कुमार राय का मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है जो न्याय की आस में खुद को घसीटते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे।
16 साल से संघर्ष कर रहे हैं दिव्यांग शिक्षक
उदय शंकर कुमार राय दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। उनकी नियुक्ति वर्ष 2010 में प्रखंड शिक्षक के रूप में हुई थी। सेवा के शुरुआती 6 महीनों के भीतर ही उनकी डिग्री पर सवाल उठाए गए जिसके बाद प्रखंड नियोजन इकाई ने उनका नियोजन रद्द कर दिया था। हालांकि जिला नियोजन इकाई में अपील करने के बाद उन्हें पुनः बहाल किया गया और उन्होंने वर्ष 2018 तक निर्बाध रूप से अपनी सेवाएं दीं।
कानूनी लड़ाई के बावजूद फिर संकट
वर्ष 2018 में फिर से उनकी डिग्री को चुनौती दी गई जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि जिला नियोजन इकाई के निर्णय को प्रखंड नियोजन इकाई निरस्त नहीं कर सकती और उनकी बहाली नियमित रहेगी। इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने एक बार फिर उनके उड़ीसा स्थित नवभारत शिक्षा परिषद से प्राप्त डिग्री की जांच कर उसे अमान्य घोषित कर दिया है।
शिक्षा विभाग का तर्क और शिक्षकों का आक्रोश
जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के अनुसार जांच के दौरान काराकाट प्रखंड के कुल 13 शिक्षकों की डिग्री मान्य नहीं पाई गई है। इन सभी शिक्षकों ने उड़ीसा के नवभारत शिक्षा परिषद से डिग्रियां हासिल की थीं जिन्हें विभाग ने फर्जी या अमान्य माना है। इस निर्णय से प्रभावित शिक्षक हताश हैं और इसे पूरी तरह गलत बता रहे हैं। डीएम कार्यालय पहुंचे उदय शंकर राय जैसे अन्य शिक्षक अब इस तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई के खिलाफ प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। फिलहाल यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और देखना यह है कि प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है।

