अविनाश श्रीवास्तव/ रोहतास। सासाराम स्थित ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मोहन साव तालाब का विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। मंगलवार को इस मामले में प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है। एसडीएम द्वारा दोनों पक्षों के साथ की गई बैठक के बाद एक पक्ष ने प्रशासन पर गंभीर आरोप मढ़ दिए हैं।
एसडीएम पर लगा एकतरफा कार्रवाई का आरोप
मंगलवार को सासाराम एसडीएम डॉ. नेहा कुमारी ने मोहन साव तालाब विवाद को लेकर दोनों पक्षों के साथ एक बैठक बुलाई थी। इस दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा दोनों पक्षों से बॉन्ड भरवाया गया। हालांकि इस कार्यवाही के बाद विवादित पक्ष के शिवशंकर कुशवाहा ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर दिया है।
शिवशंकर कुशवाहा ने सीधे तौर पर सासाराम एसडीएम पर दुर्व्यवहार और गाली-गलौज करने का आरोप लगाया है। कुशवाहा का कहना है कि मोहन साव तालाब का मामला पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है, इसके बावजूद एसडीएम द्वारा एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मामले से पीछे हटने और केस वापस लेने के लिए भारी दबाव दिया जा रहा है।
न्यायालय जाएंगे: शिवशंकर कुशवाहा
प्रशासनिक रवैये से नाराज शिवशंकर कुशवाहा ने स्पष्ट किया है कि वे इस पूरे प्रकरण के खिलाफ अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उनका कहना है कि सरकारी अधिकारी द्वारा सार्वजनिक पद पर रहते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग करना और किसी भी पक्ष पर दबाव बनाना असंवैधानिक है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।
क्या कहना है प्रशासन का?
वहीं जब इस पूरे मामले पर सासाराम एसडीएम डॉ. नेहा कुमारी से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बहुत ही संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी। एसडीएम ने कहा कि देश के नागरिक होने के नाते उन्हें पूरा अधिकार है कि वे न्यायालय जा सकते हैं। प्रशासन ने अपने स्तर पर किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार के आरोपों को दरकिनार करते हुए इसे शांति व्यवस्था बनाए रखने की सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है।
वर्तमान में मोहन साव तालाब को लेकर दोनों पक्षों और प्रशासन के बीच बना यह गतिरोध क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोग अब इस मामले में निष्पक्ष जांच की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

